जिले में खरीफ अनाज की फसलों का रकबा 8 फीसदी बढ़ा
कलेक्टर ने क्षेत्राच्छादन उत्पादकता संबंधी ली समीक्षा बैठक
कटनी – कटनी जिले में खरीफ 2020 मौसम में गतवर्ष की तुलना में इस बार अनाज की फसलों का रकबा 7 प्रतिशत बढ़ने से उत्पादन में 8 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है। इस आशय की जानकारी कलेक्टर शशिभूषण सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न खरीफ 2020 कार्यक्रम, क्षेत्राच्छादन और उत्पादकता संबंधी समीक्षा बैठक में दी गई। इस मौके पर उप संचालक कृषि ए0के0 राठौर, उप संचालक पशु चिकित्सा डॉ0 आर0पी0एस0 गहरवार, परियोजना अधिकारी उद्यान सूर्यभान सिंह, सहायक आयुक्त सहकारिता डॉ0 अरुण मसराम, अधीक्षक भू-अभिलेख मायाराम कोल भी उपस्थित थे।
कृषि उत्पादन आयुक्त द्वारा 15 अक्टूबर को वीडियो कॉन्फ्रेन्स के माध्यम से ली जा रही जबलपुर संभाग की खरीफ 2020 और रबी की तैयारियों की समीक्षा बैठक के सन्दर्भ में कलेक्टर श्री सिंह ने जिले के कृषि, उद्यानिकी, पशु चिकित्सा, मत्स्य, सहकारिता, दुग्ध संघ के अधिकारियों की बैठक लेकर विभागीय गतिविधियों की समीक्षा की। उप संचालक कृषि ने बताया कि खरीफ फसलों में धान, मक्का, दलहन, तिलहन, सभी प्रकार की फसलों के क्षेत्राच्छादनों में गतवर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे खरीफ फसलों का उत्पादन भी बढ़ने के अनुमान हैं। जिले में मुख्य फसल धान 1 लाख 72 हजार 10 हैक्टेयर में गतवर्ष बोई गई थी। जिसका उत्पादन 6 लाख 38 हजार 300 मेट्रिक टन आंका गया था। वर्ष 2020 में धान की फसल का क्षेत्राच्छादन एक लाख 87 हजार 300 हैक्टेयर क्षेत्र में हुआ है और इसका उत्पादन 7 लाख 55 हजार 900 एमटी होने का अनुमान है। इसी प्रकार हाईब्रिड मक्का में 4 प्रतिशत, धान में 7 प्रतिशत, उड़द में 5 प्रतिशत, मूंग में 20 प्रतिशत, तिल में 65 प्रतिशत और गन्ना में गतवर्ष की तुलना में 4 प्रतिशत क्षेत्राच्छादन की वृद्धि इस वर्ष की गई है। कृषि आदान की समीक्षा में बताया गया कि गतवर्ष उर्वरकों की खपत 32 हजार 500 एमटी हुई थी। जबकि इस वर्ष 35 हजार 800 एमटी उर्वरकों की खपत हुई है।
कलेक्टर श्री सिंह ने खरीफ और रबी की फसलों में जैविक बीजोपचार और जैविक उर्वरकों तथा कीटनाशकों के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिये। रबी फसलों की तैयारियों में उप संचालक कृषि ने बताया कि रबी मौसम में जिले में गतवर्ष एक लाख 94 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में पूर्ति की गई थी। वर्ष 2020-21 में एक लाख 98 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा गया है।
उद्यानिकी फसलों की समीक्षा में बताया गया कि जिले में सब्जी, पुष्प और फलों के क्षेत्राच्छादन रकबे में 526 हैक्टेयर की वृद्धि हुई है। जिसमें 263 हैक्टेयर सब्जी, 88 हैक्टेयर में पुष्प खेती, 162 हैक्टेयर क्षेत्र में फलों की खेती शामिल है। जिला खनिज प्रतिष्ठान की सहायता से सब्जी और पुष्प उत्पादन को बढ़ावा मिला है। कलेक्टर ने उद्यानिकी फसलों में भी अर्न्तवर्तीय (इन्टर क्रॉपिंग) पद्धति को बढ़ावा देने के निर्देश दिये।
पशु चिकित्सा विभाग की समीक्षा में बताया गया कि राष्ट्रीय पशु टीकाकरण एवं अन्य योजनाओं में बजट की उपलब्धता के अनुरुप सभी लक्ष्य पूरे कर लिये गये हैं। निर्मित 29 गौशालाओं में से 12 गौशालायें पशुओं की उपलब्धता के अनुसार विधिवत् संचालित की जा रही हैं। मत्स्य विभाग की गतिविधियों की समीक्षा में बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मत्स्य पालन के 1100 तालाब उपलब्ध हैं। जिनमें गतवर्ष की तुलना में 26 तालाबों में 38 हैक्टेयर मत्स्य क्षेत्र की वृद्धि की गई है। गतवर्ष जिले का मत्स्य उत्पादन 5 हजार मेट्रिक टन रहा है। इस वर्ष 6 हजार मेट्रिक टन उत्पादन प्राप्त किया जायेगा। प्रति हैक्टेयर जल क्षेत्र में 3 हजार किलो मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। सहायक आयुक्त सहकारिता डॉ0 मसराम ने बताया कि धान उपार्जन के लिये 102 खरीदी केन्द्रों के माध्यम से अब तक 37 हजार 785 किसानों का पंजीयन किया जा चुका है। धान उपार्जन के लिये 15 अक्टूबर तक किसानों का पंजीयन किया जायेगा। प्रधानमंत्री किसान निधि के पात्रता धारी 2548 किसानों में से 1144 किसानों के क्रेडिट कार्ड द्वारा ऋण वितरण किया गया है।

