ब्रेकिंग न्यूज़ : एसीसी प्रबंधन बना मौत का सौदागर
एसीसी के सीएसआर विभाग का सच आया सामने
(कैमोर) मध्य प्रदेश के कटनी जिले की औद्योगिक नगरी कैमोर में इन दिनों कोहराम मचा हुआ है। एसीसी द्वारा अमेहटा में निर्माणाधीन सीमेंट प्लांट में क्षेत्रीय बेरोजगारों की उपेक्षा करते हुए दो हजार से ज्यादा श्रमिकों को बाहर से विभिन्न राज्यों से बुलाकर काम पर लगाया गया है। रैपिड एंटीजन टेस्ट एवं मेडिकल कॉलेज से मिली रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र में पाए जाने वाले कोरोना पॉजिटिव लोगों मे एसीसी कंपनी में काम करने वालों की संख्या ज्यादा है। कैमोर के लोगों को कोरोना वायरस से संक्रमित करने में एसीसी की अहम भूमिका है लेकिन कोई भी नगरवासी स्पष्ट रूप से खुलकर नहीं बोल पा रहा है। उसके पीछे कहीं ना कहीं प्रशासनिक, राजनीतिक या उनका निजी स्वार्थ सामने आ रहा है।
एसीसी सीएसआर मात्र दिखावा
नगर में स्थित एसीसी के सीएसआर विभाग द्वारा कई कार्यक्रम आयोजित कर लाखों रुपए खर्च कर शासन की नजरों में वाहवाही लूटने का कार्य विगत कई वर्षों से किया जा रहा है। आरपीकेपी इंडिया न्यूज़ के माध्यम से कई बार अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया गया लेकिन सक्षम अधिकारियों के द्वारा इस पर ध्यान देना उचित नहीं समझा गया , शायद अधिकारी किसी विवशता के कारण जांच कराने में असमर्थ हैं।

एसीसी और एवरेस्ट कंपनी करें शीघ्र ही कोविड सेंटर की शुरुआत
एसीसी कैमोर एवं एवरेस्ट इंडस्ट्रीज लिमिटेड के पास सर्व सुविधा युक्त हॉस्पिटल हैं और इसमें स्टॉफ भी है। इसके अलावा इनके पास अन्य भवन भी उपलब्ध हैं जहां कोविड सेंटर खोला जा सकता है। एसीसी ने अमेहटा प्रोजेक्ट में लगभग दो हजार से ज्यादा बाहर के श्रमिकों को विभिन्न राज्यों से काम पर बुलाया है। इस कोरोना संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए एसीसी को 10% यानी 200 बिस्तरों का कोविड सेंटर बनाया जाना चाहिए। एसीसी का सीएसआर विभाग कई वर्षों से लाखों रुपए दिखावे में खर्च कर चुका है, अब वह समय है जिसमें सीएसआर को वास्तविकता से ईमानदारी के साथ क्षेत्र के लोगों की आवश्यकताओं के अनुसार उनकी मदद करते हुए अपने दायित्व का निर्वहन करना चाहिए।
नगर परिषद बना अधिकारियों का चारागाह – स्थायी सीएमओ नहीं होने से व्यवस्था पटरी से उतरी
नगर परिषद कैमोर में विगत कई माह से मुख्य नगरपालिका अधिकारी का पद रिक्त है । नगर परिषद बरही के मुख्य नगरपालिका अधिकारी अभयराज सिंह को प्रभारी सीएमओ बनाया गया है। दो नगर परिषदों का काम संभालना वह भी इन परिस्थितियों में कैसे संभव है? ऐसे में प्रभारी सीएमओ श्री सिंह द्वारा स्वच्छता निरीक्षक पृथ्वीराज सिंह के भरोसे नगर परिषद का संचालन किया जा रहा है जिससे नगर परिषद के सभी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। नगर विकास के नाम पर कार्यों की झड़ी लगी हुई है जितने कार्य 5 वर्षों में निर्वाचित परिषद द्वारा नहीं किए गए होंगे, उससे ज्यादा प्रशासक कार्यकाल में हो रहे हैं। एक प्रकार से नगर पंचायत कैमोर अधिकारियों का चारागाह बन चुका है।

एसडीएम की कार्यशैली पर लग रहा है प्रश्न चिन्ह
क्षेत्र की बागडोर इंसीडेंट कमांडर एसडीएम सुश्री प्रिया चंद्रावत के हाथों में है। उनके द्वारा अपने स्तर पर पूरे प्रयास भी किए जा रहे हैं किंतु समस्याएं दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही हैं उसके पीछे कहीं ना कहीं उनकी लचीली कार्यशैली की अहम भूमिका है। उनके द्वारा एसीसी, एवरेस्ट एवं स्थानीय प्रशासन से दिशानिर्देशों का कठोरता से पालन कराते हुए क्षेत्रवासियों के हित में तत्काल कोविड सेंटर/ क्वारेंटाइन सेंटर प्रारंभ कराया जाना चाहिए इसके साथ ही कलेक्टर महोदय से नगर पंचायत कैमोर के लिए स्थायी सीएमओ की नियुक्ति कराने का प्रयास करना चाहिए। अब विजयराघवगढ़ की जनता की आशाओं पर इंसीडेंट कमांडर एसडीएम कितना खरी उतरती है, यह तो उनकी कार्यशैली ही साबित करेगी।
(संतोष प्रसाद तिवारी) चीफ एडिटर RPKP INDIA NEWS

