अपने घर में अंधेरा, दूसरे शहर में उजाला! आखिर स्थानीय खबरों से परहेज क्यों…?
(बरही) क्षेत्र की जनता एक सवाल पूछ रही है कि जिस इलाके में पोर्टल और चैनल संचालित हो रहा है, उसी क्षेत्र की खबरें आखिर क्यों गायब हैं? बरही, विजयराघवगढ़, कटनी और आसपास के गांवों में रोज़ाना जनहित से जुड़े मुद्दे सामने आ रहे हैं, लेकिन उन्हें दिखाने और चलाने का साहस नहीं हो रहा। वहीं मैहर, जबलपुर, उमरिया और दूसरे जिलों की खबरों से पोर्टल और चैनल भरे पड़े हैं।
आखिर अपने क्षेत्र की खबरें दिखाने में डर किस बात का है? क्या स्थानीय भ्रष्टाचार, अव्यवस्थाएं, जनसमस्याएं और जिम्मेदारों की लापरवाही उजागर करने से किसी की नाराजगी का डर है? या फिर क्षेत्र की सच्चाई दिखाने की बजाय सुरक्षित पत्रकारिता का रास्ता चुना जा रहा है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब हर जिले और क्षेत्र में स्थानीय रिपोर्टर मौजूद हैं, तो वहां की खबरें दिखाने के लिए दूसरे जिले के मीडिया संस्थानों को आगे आने की जरूरत ही क्या है? स्थानीय हालात, स्थानीय राजनीति, सामाजिक परिस्थितियों और जनभावनाओं की जितनी समझ वहां के रिपोर्टर को होगी, उतनी बाहर के व्यक्ति को कभी नहीं हो सकती।
जनता को अपने क्षेत्र की खबर चाहिए, अपने गांव की खबर चाहिए, अपने नगर की समस्या पर आवाज चाहिए। उन्हें यह जानना है कि उनके इलाके में क्या हो रहा है, कौन जिम्मेदार है और विकास के दावे धरातल पर कितने सच हैं। पत्रकारिता का धर्म सत्ता और व्यवस्था से सवाल पूछना है, न कि सवालों से बचना।
यदि अपने ही क्षेत्र की समस्याओं पर चुप्पी साध ली जाए और दूसरे जिलों की खबरों का सहारा लिया जाए, तो यह पत्रकारिता नहीं बल्कि जिम्मेदारी से बचने का आसान रास्ता माना जाएगा।
जनता पूछ रही है कि “जब हमारे बीच रहकर हमारी आवाज़ नहीं उठानी, तो फिर स्थानीय मीडिया कहलाने का अधिकार किस बात का?”
पहले अपने क्षेत्र की खबर दिखाइए, अपने क्षेत्र के मुद्दे उठाइए, फिर दूसरे जिलों की चिंता कीजिए। क्योंकि पत्रकारिता की शुरुआत अपने क्षेत्र की जनता से होती है, दूसरे जिले से नहीं। प्रथम प्राथमिकता अपने क्षेत्र कि समस्याओ को देना चाहिए ।
✍️ नीरज तिवारी
RPKP INDIA NEWS
बरही
