मध्यप्रदेश में कोरोना कर्फ्यू 7 मई तक बढ़ाया गया – मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा

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( भोपाल ) गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बताया है कि कोरोना की चेन को तोड़ने के लिये कोरोना कर्फ्यू को 7 मई तक बढ़ाने का निर्णय कोरोना समीक्षा बैठक में लिया गया। कोरोना कर्फ्यू का कड़ाई से पालन कराया जायेगा। उन्होंने बताया कि संक्रमण पर नियंत्रण के लिये किये गये प्रयासों के सकारात्मक परिणाम आने लगे हैं। रिकवरी रेट में वृद्धि हुई है। प्रदेश को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की चिंता एवं प्रयास लगातार किये जा रहे हैं।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के निरंतर प्रयासों के परिणाम स्वरूप पॉजिटिव केस आने की दर में कमी आई है। प्रदेश स्तर पर विगत दिवस की अपेक्षा 1531 केस कम दर्ज किये गये हैं। संक्रमण पर नियंत्रण पाया गया है। प्रदेश अब 7वें स्थान के बजाय 11वें नम्बर पर आ गया है। कोरोना समीक्षा बैठक में प्रदेश के 18 जिलों में कोरोना नियंत्रण के लिये किये जा रहे उपायों की समीक्षा की गई। खण्डवा, बुरहानपुर और छिन्दवाड़ा में बेहतर प्रयास किये गये हैं। गुरुवार को 17 और जिलों की समीक्षा की जायेगी।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि आपदा की इस घड़ी में सरकार जनता के साथ खड़ी है। गरीबों को 3 माह का राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। राशन के लिये थम्ब इम्प्रेशन का बँधन नहीं रहेगा। डॉ. मिश्रा ने बताया कि 30 अप्रैल को मुख्यमंत्री स्ट्रीट वेण्डर्स के खाते में एक-एक हजार रुपये की राशि अंतरित करेंगे। प्रदेश के नागरिकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। सरकार सभी की चिंता कर रही है। स्वस्थ होकर घर जाने वाले नागरिकों से अनुरोध है कि वे अपने आसपास के लोगों को विश्वास बँधायें कि कोरोना को हौंसले से हराया जा सकता है।

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कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी विकास मिश्रा के निर्देशानुसार जिले में संचालित पत्थर खदानों और क्रशर संयंत्रों में ब्लास्टिंग के लिए उपयोग होने वाली विस्फोटक सामग्री की निगरानी तेज कर दी गई है। इसी क्रम में खनि अधिकारी कपिल मुनि शुक्ला ने खनि निरीक्षक शिशिर यादव के साथ गोपदबनास तहसील अंतर्गत ग्राम बहेरा पश्चिम, अमहवा और उपनी में संचालित स्वीकृत खदानों एवं क्रशर क्षेत्रों का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान संबंधित खदान एवं क्रशर क्षेत्रों में विस्फोटक सामग्री नहीं पाई गई। साथ ही खदान संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि किसी भी प्रकार की ब्लास्टिंग गतिविधि केवल सक्षम अधिकारी से पूर्व अनुमति प्राप्त करने के बाद ही नियमों के अनुरूप की जाए। प्रशासन ने साफ किया है कि सुरक्षा मानकों और निर्धारित नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जिले में संचालित सभी स्वीकृत खदानों एवं क्रशर संयंत्रों का आगामी दिनों में औचक निरीक्षण किया जाएगा। यदि कहीं भी नियमों के विपरीत गतिविधियां पाई जाती हैं, तो संबंधित संचालकों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसी कड़ी में 18 मई 2026, सोमवार को दोपहर 3 बजे चुरहट एवं रामपुर नैकिन क्षेत्र के खदान संचालकों के साथ उपखंड मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में विस्फोटक सामग्री के सुरक्षित रखरखाव, ब्लास्टिंग प्रक्रिया की समीक्षा और औचक जांच की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

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कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी विकास मिश्रा के निर्देशानुसार जिले में संचालित पत्थर खदानों और क्रशर संयंत्रों में ब्लास्टिंग के लिए उपयोग होने वाली विस्फोटक सामग्री की निगरानी तेज कर दी गई है। इसी क्रम में खनि अधिकारी कपिल मुनि शुक्ला ने खनि निरीक्षक शिशिर यादव के साथ गोपदबनास तहसील अंतर्गत ग्राम बहेरा पश्चिम, अमहवा और उपनी में संचालित स्वीकृत खदानों एवं क्रशर क्षेत्रों का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान संबंधित खदान एवं क्रशर क्षेत्रों में विस्फोटक सामग्री नहीं पाई गई। साथ ही खदान संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि किसी भी प्रकार की ब्लास्टिंग गतिविधि केवल सक्षम अधिकारी से पूर्व अनुमति प्राप्त करने के बाद ही नियमों के अनुरूप की जाए। प्रशासन ने साफ किया है कि सुरक्षा मानकों और निर्धारित नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जिले में संचालित सभी स्वीकृत खदानों एवं क्रशर संयंत्रों का आगामी दिनों में औचक निरीक्षण किया जाएगा। यदि कहीं भी नियमों के विपरीत गतिविधियां पाई जाती हैं, तो संबंधित संचालकों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसी कड़ी में 18 मई 2026, सोमवार को दोपहर 3 बजे चुरहट एवं रामपुर नैकिन क्षेत्र के खदान संचालकों के साथ उपखंड मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में विस्फोटक सामग्री के सुरक्षित रखरखाव, ब्लास्टिंग प्रक्रिया की समीक्षा और औचक जांच की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।