कार्यालयों, स्कूलों एवं आगनवाड़ियों में मलेरिया जनजागरूकता अभियान चलाया गया
(भोपाल) मलेरिया जनजागरूकता के लिए सोमवार को मलेरिया दिवस मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से मलेरिया होने के कारणों, बचाव एवं उपाय के बारे में जानकारी दी गई। मैदानी कार्यकर्ताओं के द्वारा वार्ड कार्यालयों, स्कूलों एवं आगनवाड़ियों में पोस्टर प्रतियोगिता, निबंध लेखन, रैली एवं परामर्श सत्रों के माध्यम से मलेरिया के बारे में बताया गया। मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के लिए भोपाल जिले में निरंतर घर – घर सर्वे एवं जनजागरूकता कार्य किया जा रहा है ।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि मच्छरजनित बीमारियों में मलेरिया सबसे प्रचलित बीमारी है। यह बीमारी मादा एनाफिलीज़ मच्छर के काटने से होती है। ठंड लगकर बुखार आना मलेरिया का प्रमुख लक्षण हैं। मलेरिया की जांच एवं दवाईयां सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में निःशुल्क प्रदान की जाती है। साथ ही आशा कार्यकर्ताओं से संपर्क कर भी जांच कराई जा सकती है।
प्रदेश में मलेरिया फैलाने वाले दो परजीवी प्लाजमोडियम फैल्सीफेरम एवं प्लाजमोडियम वाइवेक्स है। एनॉफिलीज मच्छर रूके हुए साफ पानी में पनपता है, जैसे कि धान का खेत, तालाब, गढ्ढे, खाई, कृत्रिम जलाशय छत पर बनी हुई टंकी, जल एकत्रित करने के लिए जमीन के अंदर बनी टंकी, अनुपयोगी कुएँ, जलधारा के किनारे से एकत्रित जल, नदियां, हेण्डपप, नल के आस – पास जमा पानी, पशुओं के पानी पीने के हौद, नहरों में रूके हुये पानी में इत्यादि प्रत्येक उम्र, वर्ग के लोग मलेरिया से पीड़ित हो सकते है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे और गर्भवती महिला को मलेरिया से ज्यादा खतरा होता है।
जिला मलेरिया अधिकारी श्री अखिलेश दुबे ने बताया कि तेज ठण्ड देकर बुखार, ज्वर के साथ, कंपकपी, सिरदर्द, बदनदर्द, उल्टी होना मलेरिया के प्रमुख लक्षण है। गम्भीर अवस्था में यह खून की कमी का कारण बनता है। यदि शीघ्र एवं पर्याप्त उपचार नहीं किया गया तो मलेरिया से रोगी की मृत्यु भी हो सकती है। गर्भावस्था में मलेरिया गंभीर होता है और जच्चा – बच्चा की जान को खतरा भी हो सकता है। किसी भी बुखार को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। यह मलेरिया के कारण भी हो सकता है। बुखार की स्थिति में मरीज की तुरंत आर.डी.टी. किट से जांच करके एवं मलेरिया पॉजिटिव पाये जाने पर मलेरिया उपचार नीति के अनुसार पूर्ण उपचार किया जा सकता है।
मलेरिया निरोधक दवाईयां कभी भी खाली पेट नहीं लेना चाहिए। मलेरिया पॉजिटिव मरीज के उपचार पूर्ण होने के 15 दिवस उपरांत मरीज का फॉलोअप किया जाएगा। मच्छर को पनपने से रोकना एवं मच्छरों से स्वयं को बचाना इन बीमारियों से बचने का सबसे आसान उपाय है। पानी के भराव को रोकना, आसपास के परिवेश में स्वच्छता का निर्माण, मच्छरदानी का उपयोग इत्यादि बेहद सरल उपाय हैं जो कि मच्छरों से एवं उनसे होने वाली बीमारियों से बचाव कर सकता है। राष्ट्रीय वैक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत वैक्टर जनित रोग जैसे मलेरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया, कालाअजर, फाइलेरिया एवं जापानीज इनसिफेलाइटिस बिमारियों का नियंत्रण किया जा रहा है।
