जिस लाउडस्पीकर पर नेता कर रहे सियासत , जाने कैसे हुआ था इसका आविष्कार
(नई दिल्ली) देशभर में इन दिनों एक मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में है. देश की सियासत में हर तरफ इसको लेकर बातचीत हो रही है. जी हां ठीक समझा आपने हम लाउडस्पीकर की बात कर रहे हैं. जिसको लेकर जमकर राजनीति हो रही है. लाउडस्पीकर का काम आवाज को दूर पहुंचाने का था, ताकि लोगों को दूर से ही जानकारी मिल सके. यह लोगों का मनोरंजन भी करता है. लेकिन आज यही लाउडस्पीकर विवाद की वजह बनी हुई है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि विवाद की वजह बने इस लाउडस्पीकर का आविष्कार कैसे हुआ था. यह किसकी सोच थी. इन सब बातों की जानकारी हम आपको बताने जा रहे हैं.
161 साल पहले हुआ था लाउडस्पीकर
जिस लाउडस्पीकर पर इतना विवाद हो रहा है उसका आविष्कार आज से 161 साल पहले हुआ था. जोहान फिलिप रीस नाम के शख्स ने टेलिफोन में लाउडस्पीकर लगाया था, ताकि आवाज और टोन अच्छे से सुनाई पड़े. बाद में टेलिफोन बनाने वाले ग्राहम बेल ने सन 1876 में लाउडस्पीकर को पेटेंट करा लिया. जिसके बाद आने वाले समय में लाउडस्पीकर में कई और भी सुधार किए गए. अर्नस्ट सिमेंस ने लाउडस्पीकर को अलग स्वरुप दिया.
1924 में पहली बार रेडियो में लगा
बाद में लाउडस्पीकर को बड़ा बनाया गया, धातु को गोलाकार कर उसे इस तरह से बनाया गया कि उससे निकलने वाली आवाज दूर तक जाए और लोगों को आसानी से स्पष्ट सुनाई दे. इस तरह लाउडस्पीकर दुनिया में लोगों की पसंद बनता गया. 1924 में पहली बार लाउडस्पीकर रेडियो में लगाया गया. इस काम को चेस्टर डब्ल्यू राइस और एटीएंडटी के एडवर्ड डब्ल्यू केलॉग ने अंजाम दिया. इसके अलावा 1943 में आल्टिक लैनसिंग ने इसे 604 स्पीकर्स और डुपलेक्स ड्राइवर्स बनाया, जिसे ‘वॉयस ऑफ द थियेटर’ कहा जाता था. इसके बाद एडगर विलचर 1954 में एकॉस्टिक सस्पेंशन की खोज की, जिसके बाद स्पीकर्स वाले म्यूजिक प्लेयर्स का दौर आया.
कैसे काम करता है लाउडस्पीकर
दरअसल, लाउडस्पीकर का सबसे अहम काम आवाज को दूर तक पहुंचाने का होता है, इस डिवाइस में अंदर एक चुंबक लगा होता है, जिस पर एक पतली जाली लगी होती है, जैसे ही इलेक्ट्रिकल तरंगें चुंबक से टकराती है, तो इनमें वाइब्रेशन पैदा होता है, इस वाइब्रेशन से जाली हिलती है, जिसे एमप्लीफाई करके आवाज बाहर की ओर भेज दिया जाता है. जिसके बाद तेज आवाज बाहर निकलती है. जब लाउडस्पीकर किसी विद्युत तरंग को अलग-अलग फ्रिक्वेंसी में रिसीव करता है, तो उसे उसी तरह बदलता है. इसलिए आवाज कम-ज्यादा होती और सुनाई देती है.

