मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल का बदल सकता है नाम , CM शिवराज की मिली सहमति
(भोपाल) रामचरित मानस पर चल रहे घमासान को लेकर बागेश्वर धाम के संत धीरेंद्र शास्त्री के गुरु जगद्गुरु रामभद्राचार्य का एक बयान सामने आया है। रामभद्राचार्य ने सीएम शिवराज सिंह चौहान से मिलने के बाद भोपाल के नाम बदलने को लेकर बड़ी बात कही है।
बदल सकता है भोपाल का नाम !
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात करने के बाद स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि भोपाल का नाम भोजपाल करने पर मुख्यमंत्री सहमत हो गए है। उन्होंने मुझसे इस संबंध में केंद्र सरकार को पत्र लिखने की बात कही है। ज्ञात हो की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गत दिवस जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य से मुलाकात की थी। यदि सीएम स्वामी जी के मांग पर पीएम को पत्र लिखते हैं और इसपर प्रधानमंत्री के साथ-साथ केंद्रीय गृह मंत्रालय की सहमती मिलती है तो नाम बदलने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इससे बाद राजपत्र में सूचना प्रकाशन के साथ अन्य कार्य किए जाएंगे।
रामचरित मानस की प्रतियां जलाना दुर्भाग्यपूर्ण
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि रामचरितमानस की प्रतियां जलाना दुर्भाग्यपूर्ण है। स्वामी प्रसाद मौर्य और बिहार के शिक्षा मंत्री मूर्ख हैं। ये ऐसे लोग जिन्हें रामायण का क, ख, ग भी नहीं आता, ऐसे लोगों के दंड की व्यवस्था की जा रही है। भगवान भी दंड देंगे मैं भी दंड दूंगा।रामभद्राचार्य ने कुछ दिन पहले कहा था कि भोपाल का नाम भोजपाल नहीं होता तब तक अगली बार कथा करने नहीं आऊंगा। उन्होंने कहा कि भोजपाल नगरी के राजा भोज पालक थे। जब सरकार होशंगाबाद का नाम नर्मदापुरम कर चुकी है, इलाहाबाद का नाम प्रयागराज हो गया है, फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या कर दिया गया है तो भोपाल का नाम बदलकर भोजपाल क्यों नहीं किया जा सकता ?
संतों पर सवाल खड़े करने वाले हिंदुओं के जयचंद
स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा की संतों पर सवाल खड़े करने वाले हिंदुओं के जयचंद हैं , जिन्हें प्रमाण चाहिए वह मुझे देख लें । मैं देख नहीं सकता, लेकिन डेढ़ लाख पन्ने मुझे कंठस्थ है। मैंने हजारों बार बताया यहां ताड़न का अर्थ शिक्षा है, ढोल गवार शुद्र पशु नारी सकल ताड़ना के अधिकारी है। मतलब सभी शिक्षा के अधिकारी हैं, अर्ध ज्ञानी लोग इसका गलत अर्थ प्रचारित करते हैं।

