मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा के कई पूर्व मंत्रियों पर डोरे डाल रही कांग्रेस
(भोपाल) मध्य प्रदेश में भाजपा के कई पूर्व मंत्री और पूर्व विधायकों पर कांग्रेस डोरे डाल रही है। ये दिग्गज नेता भाजपा के मिशन-2023 की राह में मुसीबत खड़ी कर सकते हैं। कद्दावर मंत्री रहे जयंत मलैया, डा गौरीशंकर शेजवार, दीपक जोशी, रामकृष्ण कुसमरिया जैसे पूर्व मंत्री आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं। कांग्रेस के बड़े नेता इन भाजपा नेताओं के निरंतर संपर्क में हैं। इन नेताओं में से बहुत से ऐसे हैं, जिनकी परंपरागत सीट पर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में आए नेता चुनाव जीत गए हैं। वहीं, गौरीशंकर बिसेन अपनी बेटी को टिकट देने के लिए पार्टी पर दबाव बना रहे हैं। पार्टी ने इन्कार किया तो वे भी पैंतरा बदल सकते हैं।
मध्य प्रदेश भाजपा में बदली हुई परिस्थितियां नवंबर-दिसंबर 2023 के विधानसभा चुनाव में अपनों से ही मुसीबत के संकेत दे रही है। जो चेहरे पार्टी में कभी कद्दावर माने जाते थे, कैबिनेट का हिस्सा थे, अब वही जीत के रास्ते पर कांटे बिछा सकते हैं। इन परिस्थितियों की जड़ में ज्योतिरादित्य सिंधिया का अपने समर्थकों सहित भाजपा में शामिल होना है। 2020 में सिंधिया और उनके समर्थकों के आने के बाद जिन सीटों पर उपचुनाव हुए, वहां भाजपा के पुराने चेहरों को मौका न मिलना मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
जयंत मलैया को टिकट मिलने पर संशय
कद्दावर मंत्री रहे जयंत मलैया की दमोह सीट से फिलहाल कांग्रेस विधायक हैं लेकिन मलैया की उम्र और उपचुनाव में उनके बेटे पर लगे भितरघात के आरोप के कारण भाजपा उन्हें टिकट देती है या नहीं, इस पर संशय है। यही वजह है कि कांग्रेस इस तैयारी में है कि मलैया को भाजपा टिकट नहीं देती है तो वह इसका फायदा उठाएगी। ऐसी परिस्थिति में कांग्रेस अपने विधायक अजय टंडन की जगह मलैया पर दांव लगा सकती है और टंडन को छह महीने बाद दमोह से ही लोकसभा का प्रत्याशी बनाया जा सकता है।
मुदित शेजवार के राजनीतिक भविष्य पर प्रश्नचिन्ह
सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के कुछ नेताओं को इस लाइन पर काम करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। वहीं अनुसूचित जाति वर्ग के बड़े नेता डा. गौरीशंकर शेजवार की सांची विधानसभा क्षेत्र पर भी स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी का कब्जा है। ऐसी स्थिति में शेजवार के बेटे मुदित शेजवार के राजनीतिक भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। मुदित वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी थे लेकिन चुनाव हार गए थे। कांग्रेस के नेता शेजवार के संपर्क में हैं। उन्हें प्रस्ताव दिया गया है कि वे स्वयं चौधरी के खिलाफ चुनाव लड़ने को तैयार हों तो कांग्रेस उन्हें टिकट दे सकती है।
दीपक जोशी का राजनीतिक भविष्य भी संकट में
दीपक जोशी की सीट हाटपिपल्या विधानसभा क्षेत्र भी अब कांग्रेस से आए मनोज चौधरी के पास है। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के बेटे दीपक का राजनीतिक भविष्य भी संकट में हैं। वर्ष 2020 में हुए उपचुनाव के दौरान भी जोशी ओर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के बीच मुलाकातें हुई थीं। तब भी कयास लगाए जा रहे थे कि जोशी कांग्रेस से चुनाव लड़ सकते हैं लेकिन अब बदले हुए माहौल में जोशी पर कांग्रेस नेता फिर डोरे डाल रहे हैं।
कई अन्य का भविष्य भी संकट में
अयोध्या के राम जन्मभूमि आंदोलन के अगुवा रहे पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया और माया सिंह की सीट भी कांग्रेस से आए नेताओं के पास चली गई है। पवैया मप्र के कद्दावर नेता हैं, महाराष्ट्र के सह प्रभारी होने के नाते राष्ट्रीय पदाधिकारी भी हैं। ऐसे में भाजपा के सामने संकट है कि इन्हें कहां से एडजेस्ट किया जाए।

