वर्ष 2015 में हुए 500 करोड़ की जमीन घोटाले की शिकायत जांच के बाद एफआईआर दर्ज
करोड़ो रूपये कीमत की जमीन का फर्जीवाड़ा करने वाले 4 आईएएस अफसरों पर केस दर्ज
(भोपाल) जबलपुर और कटनी जिलों में आदिवासियों की 500 करोड़ की जमीनें गैर आदिवासियों को बेचने की मंजूरी देने के मामले में लोकायुक्त ने 4 आईएएस अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह आईएएस अफसर दीपक सिंह, ओमप्रकाश श्रीवास्तव, बसंत कुर्रे और एमपी पटेल हैं। चारों अफसर 2006 से 2011 के बीच जबलपुर जिले में अपर कलेक्टर के पद पर थे। इसी दौरान आदिवासियों की जमीनें हेरफेर कर बेची गईं। कुल 13 मामलों में करीब 50 हेक्टेयर से अधिक जमीनों का हस्तांतरण गैर आदिवासियों के नाम किया गया। मामले का खुलासा 2013 से 2015 के बीच आरटीआई के जरिये हुआ। इसी आधार पर 2015 में शिकायत लोकायुक्त में की थी। लोकायुक्त की जबलपुर संभाग स्तरीय सतर्कता समिति इसकी जांच कर रही थी। इस समिति ने 13 फरवरी 2023 को जांच रिपोर्ट लोकायुक्त को सौंपी जिसमें इस पूरे कांड को एक सुनियोजित षड्यंत्र और सामूहिक भ्रष्टाचार बताया।
लोकायुक्त की एफआईआर के मुताबिक जमीन हस्तांतरण के इस मामले में चारों अफसरों ने कानून के उल्लंघन के साथ-साथ पद का दुरुपयोग किया। पूरे षड्यंत्र में कुछ आदिवासी भी शामिल थे। मांगीलाल मरावी, जगदीश सिंह गोंड, समलू सिंह मरावी नाम के यह आदिवासी पहले छोटे-छोटे गरीब आदिवासियों की जमीन खुद खरीदते थे। एक-डेढ़ साल बाद कभी आर्थिक तंगी और कभी जमीन को एक हिस्से को बंजर बताकर दूसरे हिस्से को उपजाऊ बनाने की लिए पैसे की जरूरत बताकर जमीन बेचने की मंजूरी का आवेदन अपर कलेक्टर के यहां लगाते थे। चारों ही अपर कलेक्टर बिना देरी के जमीनें बेचने के आदेश कर देते रहे। मप्र लैंड रेवेन्यू कोड की धारा 165 का खुला उल्लंघन कर यह जमीनें बेची गईं। ज्यादातर जमीनों को जबलपुर निवासी मीना अग्रवाल का परिवार और एक सत्यपाल दरियानी के परिवार ने खरीदा था। कुल 13 प्रकरणों में से सर्वाधिक 7 मंजूरियां अकेले बसंत कुर्रे ने जारी की थीं। इसके बाद 3 मामलों में ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने, 2 मामलों में एमपी पटेल और 1 मामले में दीपक सिंह ने जमीन हस्तांतरण की अनुमति दी थी l
रिपोर्ट :- पंकज पाराशर , RPKP INDIA NEWS , छतरपुर
