भारतीय मन हर स्थिति में “राम” को साक्षी बनाने का आदी है

(मैहर)  भारतीय मन हर स्थिति मे राम को अपने जीवन मे साक्षी बनाने का आदि है उसी के अनुसार यह कह सकते है की,,दुःख में –“हे राम”पीड़ा में –“अरे राम”,,लज्जा में —
“हाय राम”अशुभ में –“अरे राम राम”अभिवादन में–“राम राम”
शपथ में–
“राम दुहाई”
अज्ञानता में —
“राम जाने”
अनिश्चितता में –“राम भरोसे”
अचूकता के लिए–“रामबाण”
सुशासन के लिए–“रामराज्य”
मृत्यु के लिए —
“राम नाम सत्य”है। जैसी अभिव्यक्तियां पग-पग पर “राम” को,साथ खड़ा करतीं हैं।

रवींद्र सिंह (मंजू सर) मैहर की कलम कहती है कि”राम” भी इतने सरल हैं कि…हर जगह खड़े हो जाते हैं।जिसका कोई नहीं…उसके लिए “राम” हैं-“निर्बल” के बल “राम”। जय सिया राम। जय जय राम। जय श्री राम।आप सभी को राम राम।

✍️ रवींद्र सिंह (मंजू सर)
                 मैहर

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