किशोरावस्था ही स्वयं व देश की उन्नति का सही समय है – जिला न्यायाधीश

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(राजगढ़़) बाल संवर्धन एवं संरक्षण सप्ताह अंतर्गत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली द्वारा संचालित बच्चों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवायें योजना तथा भारत के संविधान में निहित मूल कर्तव्य, अधिकार, बाल श्रम व बाल विवाह निषेध आदि विषयों पर केन्द्रीय विद्यालय में आयोजित विधिक साक्षरता एवं जागरूकता कार्यक्रम में उपस्थित जिला न्यायाधीश श्री राजेश कुमार देवलिया ने अपने वक्तव्य में कहा कि, 16 से 20 वर्ष की आयु वर्ग के बालक- बालिकाओं भरपूर जोश, कुछ भी कर गुजरने की ललक व उमंग रहती है और अवसर पाते ही वे मौका हाथ से नहीं गंवाते हैं। किन्तु संपूर्ण जागरूकता के अभाव में वे कई बार गलत दिशा में भटक जाते हैं, जैसे- नशे की लत, व्यस्न, गलत व्यवसाय , गलत व्यक्तियों की संगत आदि, जिससे कि उनका भविष्य भी अंधकारमय होने लगता है जबकि उसी उर्जा का प्रयोग वे सही दिशा में, सही कार्यों में, सकारात्मक सोच के साथ करें तो उनका जीवन खुशनुमा हो जायेगा। इसीलिये किशोरावस्था ही उनके स्वयं व देश की उन्नति का सही समय होता है। इस क्रम में मुख्य अतिथि द्वारा बताया गया कि, बाल श्रम, नशा उन्मूलन आदि विषयों पर भी विस्तृत रूप में विचार व्यक्त किये गये।

विद्यार्थियों हेतु आयोजित जागरूकता एवं साक्षरता कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिला न्यायाधीश श्री राजेश कुमार देवलिया के साथ ही विशेष अतिथि सचिव एवं जिला न्यायाधीश श्री योगीराज पाण्डेय तथा किशोर न्याय बोर्ड की प्रधान न्यायाधीश सुश्री स्निग्धा पाठक भी उपस्थित थी। कार्यक्रम में विशेष अतिथि श्री योगीराज पाण्डेय द्वारा बच्चों के कानूनी अधिकारों, संविधान में निहित मूल कर्तव्य एवं अधिकारों के बारे में समझाया गया। इसी कड़ी में प्रधान न्यायाधीश किशोर न्याय बोर्ड द्वारा भी किशोरों से संबंधित अपराधों विधियों आदि के बारे में बताया गया।

विधिक जागरूकता साक्षरता कार्यक्रम के उपरांत केन्द्रीय विद्यालय प्रांगण में मुख्य अतिथियों द्वारा फलदार पौधे रोपित किये गये।इस अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं के अतिरिक्त विद्यालय की प्राचार्य श्री रोमा सांखला सहित विद्यालय के समस्त सहायक स्टाफ भी उपस्थित रहे।

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