हमारी साफ और स्वच्छ नदियां हो रही मैली, इसलिए स्वच्छता अभियान जरूरी
स्वच्छता के स्वभाव और संस्कार व्यवहार में आये तो जलस्रोतों से मिलेगा जीवन भर स्वच्छ पानी
बालाघाट संसाधनों की भूमि के नाम से भी जाना जाता है। ये संसाधन हमें वेनगंगा, घिसर्री और देव नदियों के द्वारा हम तक पहुँच रहें है। नदियों में मुख्य रूप से वेनगंगा नदी आज प्रदेश की सबसे साफ और स्वच्छ नदी के रूप में जानी जाती है। इसका एक कारण है, इस नदी पर कोई भी उद्योग या फैक्ट्री स्थापित नहीं है। इसलिए साफ और स्वच्छ भी है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि वेनगंगा का स्वरूप बनाये रखें। गांगुलपारा, रमरमा, गोदरी और सतनारी जैसे जल प्रपात बालाघाट के सुंदर और मनोरम स्थल है। इन पर गंदगी और कचरा फैलाने से बचाने की जिम्मेदारी सैलानियों को भी करनी चाहिए। ताकि आने वाली पीढ़ी को हम साफ स्वच्छ और प्राकृतिक स्थल दे पाए। आज कई पर्यटक झरनों व नदियों में बिना सोचे कचरा उड़ेलने का काम कर जाते हैं। साथ ही ऐसे स्थलों पर अपनी निशानी के तौर पर अनावश्यक पेंटिंग जैसी गलतियां कर आते है। इससे उनका सौंदर्य बिगड़ रहा है।
क्या कहते है विशेषज्ञ
वेनगंगा नदी पर कोई फैक्ट्रियां नहीं है लेकिन मनुष्य से भी प्रदूषण फैल रहा है। इस प्रदूषण के फैलने से नदियोँ में तत्वों की कमी होगी। इस पर युवा पीढ़ी और पर्यटन स्थलों पर जाने वाले सैलानियों को जागरूक होना होगा। पानी की गुणवत्ता बनाने के लिए प्रदूषण से मुक्त रखना होगा। भूगर्भ शास्त्री डॉ. संतोष सक्सेना
