कृत्रिम पैर मिलने से श्री सल्लाम को कटर मशीन में पैर खोने की तकलीफ़ से मिली राहत “खबर खुशियों की” –

( छिन्दवाड़ा )

    मानव शरीर के हर एक अंग की अपनी अलग उपयोगिता और महत्व है। सभी अंगों के आपसी सामंजस्य से ही मनुष्य अपनी दिनचर्या सहित तमाम साधारण और विशेष कार्यों को कर पाता है, लेकिन दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें या तो जन्मजात या किसी बीमारी या किसी दुर्घटनावश शरीर के किसी अंग को खोना पड़ता है। छिंदवाड़ा जिले के ग्राम झंझरिया खुटिया निवासी श्री शिवपाल सल्लाम को भी एक हादसे में अपना पैर खोना पड़ा था। कटर मशीन से पैर कट जाने के कारण श्री सल्लाम चलने-फिरने में असमर्थ हो गए थे। ऐसे में उन्हें अपनी दिनचर्या के कार्यों को करने में भी कितनी असुविधा होती होगी इसका अंदाजा लगाया ही जा सकता है। खुशी की बात यह है कि उनको इस तकलीफ से अब राहत मिल गई है और वह फिर से सामान्य जीवन जीने लगे हैं। इस कार्य में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी तकलीफ दूर होने पर श्री सल्लाम बहुत खुश हैं और वे शासन एवं जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र को धन्यवाद दे रहे हैं।
प्रशासनिक अधिकारी श्री पंचलाल चंद्रवंशी ने बताया कि श्री सल्लाम पिता श्री सुमन सल्लाम जब जिला मेडिकल बोर्ड में प्रमाण पत्र बनवाने पहुंचे तो वहां फील्ड एवं पब्लिसिटी असिस्टेंट श्रीमती सोनम साहू द्वारा जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र के संबंध में जानकारी दी गई और बताया गया कि वे केंद्र में आकर कृत्रिम पैर बनवा सकते हैं । यह जानकारी मिलने पर श्री सल्लाम की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वे बहुत प्रसन्न हुये कि अब वे पहले की तरह चल पायेंगे । जब वे जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र पहुंचे तो प्रोस्थेटिक एवं आर्थोटिक टेक्नीशियन श्री विकास मिश्रा द्वारा मूल्यांकन कर उनका दाहिना कृत्रिम पैर बनाकर लगाया गया। अब श्री सल्लाम अपने पैरों के सहारे चलने फिरने लगे हैं। प्रशासनिक अधिकारी श्री चंद्रवंशी ने बताया कि मोहबे मार्केट स्थित जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र में अब नई टेक्नोलॉजी से उपचार किये जा रहे हैं। इस केंद्र में दिव्यांगों के लिये फि‍जियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी, आडियोमीट्री, साइकोलॉजिकल काऊंसलिंग, मोबिलिटी ट्रेनिंग, विशेष शिक्षा आदि योजनायें संचालित की जा रही है और उन्हें लाभांवित किया जा रहा है। दिव्यांगजनों को अधिक से अधिक योजनाओं का लाभ मिल सके इसके लिये फील्ड एंड पब्लिसिटी असिस्टेंट के द्वारा फील्ड में जाकर दिव्यांगों को आवश्यक जानकारी प्रदान की जा रही है। इस तरह उन्हें सशक्त बनाकर समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जिले के जरूरतमंद कोई भी दिव्यांग इस केंद्र में आकर शासन की योजनाओं का लाभ ले सकते हैं।
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