मैहर वाली शारदा माता धाम से एक अनमोल चिंतन : शिव तत्व विचार

(मैहर) भगवान शिव का स्वरूप देखने में बड़ा ही प्रतीकात्मक और संदेशप्रद है। भगवान शिव के हाथों में त्रिशूल दैहिक, दैविक और भौतिक तीनों तापों का प्रतीक है। भगवान शिव के हाथों में केवल त्रिशूल ही नहीं है अपितु जो त्रिशूल है, उसमें भी डमरू बँधा हुआ है। त्रिशूल वेदना का तो डमरू आनंद का प्रतीक है।

रवींद्र सिंह मंजू सर मैहर की कलम कहती है कि जीवन ऐसा ही है, यहाँ वेदना तो है ही लेकिन आनंद भी कम नहीं है। आज आदमी अपनी वेदनाओं से ही इतना ग्रस्त रहता है, कि आनंद उसके लिए एक काल्पनिक वस्तु मात्र रह गई है। दु:खों से ग्रस्त होना यह अपने हाथों में नहीं लेकिन दुःखों से त्रस्त होना यह अवश्य अपने हाथों में है।

भगवान शिव के हाथों में त्रिशूल और उसके ऊपर लगा डमरू हमें इस बात का संदेश देते हैं, कि भले ही त्रिशूल रुपी तीनों तापों से तुम ग्रस्त हों लेकिन डमरू रुपी आनंद भी साथ होगा तो फिर नीरस जीवन भी उमंग और उत्साह से भर जाएगा।

ॐ नमः शिवाय। मैहर वाली शारदा माता सदा अपना आशीर्वाद बनाए रखे।

✍️ रवींद्र सिंह (मंजू सर)
RPKP INDIA NEWS
                मैहर

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