मैहर की हवा बनी जहर, प्रशासन गहरी नींद में, लापरवाही की हदें पार
(मैहर) धार्मिक, सांस्कृतिक और औद्योगिक पहचान रखने वाला मैहर शहर आज एक गंभीर संकट से जूझ रहा है – वातावरण की ज़हरीली हवा से। बीते दो दिनों में मैहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) विश्व सूचकांक में 212 वें स्थान तक पहुंच गया है, जो कि “बहुत अस्वस्थ” श्रेणी में आता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह हवा बच्चों, बुजुर्गों और बीमारों के लिए जानलेवा हो सकती है।
शहर में प्रदूषण मापने के लिए जो उपकरण स्वच्छ स्थल पर लगाए गए थे, उन्होंने भी हवा को “खतरनाक” बताना शुरू कर दिया है। इसके बावजूद, प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह मौन और निष्क्रिय है। न कोई आपातकालीन चेतावनी, न कोई धूल नियंत्रण उपाय और न ही उद्योगों पर शिकंजा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमेंट फैक्ट्रियां, खनन कार्य, और बेतरतीब ट्रैफिक लगातार प्रदूषण बढ़ा रहे हैं लेकिन प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। शहर में ना कोई नियमित सफाई है, ना हरियाली बढ़ाने की कोई ठोस योजना।
सवाल ये उठता है कि क्या मैहर जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले शहर को प्रशासन प्रदूषण की कब्रगाह बनने देगा?
जनता अब पूछ रही है जब सांस लेना भी दूभर हो गया है, तब प्रशासन कहां है? क्या अधिकारियों की तब नींद खुलेगी जब बीमारियों की लहर घर-घर तक पहुंच जाएगी? मैहर की जनता अब जवाब चाहती है, राहत नहीं, क्रांति की ज़रूरत है।
