भटूरा खदान में दर्दनाक हादसा: नाबालिग मजदूर की मौत से हड़कंप, सुरक्षा नियमों और बाल मजदूरी पर उठे सवाल

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(मैहर) मैहर के भटूरा क्षेत्र में दोपहर एक बजे एक खदान में बड़ा हादसा हो गया। हुकुमचंद जैन कंपनी की पत्थर खदान में पोकलेन मशीन पलटने से एक नाबालिग मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान घोरबाई गांव निवासी 17 वर्षीय अनिकेत सिंह गोंड (आदिवासी समुदाय) के रूप में की गई है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में गुस्सा और आक्रोश का माहौल है।

कैसे हुआ हादसा

घटना दोपहर करीब 1 बजे की है। जानकारी के मुताबिक कंपनी की भटूरा स्थित खदान में पोकलेन मशीन से पत्थर की खुदाई का काम चल रहा था। इसी दौरान मशीन अचानक असंतुलित होकर पलट गई, और उसके नीचे पास में मौजूद नाबालिग हेल्पर अनिकेत दब गया। मजदूरों ने आनन-फानन में उसे बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी जान जा चुकी थी।

बिना सूचना परिजन, सीधे अस्पताल पहुंचाया शव

सबसे चिंताजनक बात यह रही कि हादसे के बाद कंपनी प्रबंधन ने परिजनों को सूचना देने के बजाय मृतक को सीधे विजयराघवगढ़ अस्पताल पहुंचा दिया। परिजनों को बाद में ग्रामीणों के जरिए घटना की जानकारी मिली। लोगों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन घटना को दबाने की कोशिश कर रहा था।

बाल मजदूरी और सुरक्षा नियमों की खुली धज्जियां

घटना ने खदानों में हो रहे बाल मजदूरी के मामलों और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कानूनन किसी भी खदान में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से काम कराना सख्त अपराध है, लेकिन इसके बावजूद खदानों में नाबालिगों से काम लेना आम बात बन चुकी है। स्थानीय मजदूरों के अनुसार खदानों में न तो सेफ्टी बेल्ट, हेलमेट या कोई सुरक्षा उपकरण दिए जाते हैं और न ही पर्याप्त प्रशिक्षण। मशीनों के संचालन के दौरान मजदूरों की जान को गंभीर खतरा बना रहता है।

प्रशासनिक लापरवाही पर ग्रामीणों में आक्रोश

घटना के कई घंटे बाद तक पुलिस मौके पर नहीं पहुंची थी। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन और श्रम विभाग समय-समय पर निरीक्षण करते, तो ऐसी घटनाएं न होतीं।

कानूनी कार्रवाई और मुआवजे की मांग

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि कंपनी के खिलाफ बाल मजदूरी और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया जाए। मृतक के परिवार को उचित मुआवजा और स्थायी आर्थिक सहायता दी जाए। खदानों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए। संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

क्या कहता है कानून

बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से खदानों में काम कराना अपराध है। माइन सेफ्टी एक्ट के अनुसार किसी भी खदान में सुरक्षा उपकरण, आपातकालीन इंतज़ाम और प्रशिक्षित स्टाफ अनिवार्य है। इस तरह की लापरवाही के लिए कंपनी पर आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है।

फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे ।

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