सिविल अस्पताल मैहर बना अराजकता का अड्डा! अस्पताल की छत पर मिले इस्तेमाल व नए कंडोम एवं शराब की खाली बोतलें
(मैहर) मां शारदे की पावन धार्मिक नगरी मैहर में स्थित सिविल अस्पताल की छवि उस समय शर्मसार हो गई, जब राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन, नई दिल्ली – जिला संगठन मैहर की टीम ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल के चौथे माले की छत पर इस्तेमाल किए गए कंडोम, नए कंडोम और शराब की कई खाली बोतलें मिलने से पूरे शहर में आक्रोश फैल गया है। अस्पताल जैसे पवित्र और संवेदनशील स्थान पर इस प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री का मिलना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी सवाल खड़े करता है कि रात्रिकालीन ड्यूटी पर तैनात स्टाफ, गार्ड और जिम्मेदार अधिकारी आखिर कर क्या रहे हैं?
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि रात में कुछ नर्सों का व्यवहार संतोषजनक नहीं है, वहीं सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से भगवान भरोसे है। गार्ड और ऊपर ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों की घोर लापरवाही के चलते असामाजिक तत्वों का अस्पताल परिसर में खुलेआम प्रवेश हो रहा है। इतना ही नहीं, रात्रिकालीन समय में डॉक्टरों के साथ अभद्रता की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे चिकित्सा स्टाफ खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। अस्पताल के ऊपरी हिस्से में अंधेरा, लाइट की पर्याप्त व्यवस्था नहीं, जो अवैध गतिविधियों को खुला निमंत्रण दे रहा है। सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?

राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने इस पूरे मामले की कड़ी शब्दों में निंदा करते हुए जिला प्रशासन, कलेक्टर, जन प्रतिनिधियों, सिविल अस्पताल प्रभारी एवं संबंधित अधिकारियों से तत्काल संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने अस्पताल परिसर में स्थायी पुलिस व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरे, प्रकाश व्यवस्था और रात्रिकालीन सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की आवश्यकता बताई है।
निरीक्षण के दौरान राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन नई दिल्ली, मध्यप्रदेश के उपाध्यक्ष रविंद्र सिंह मंजू, जिला अध्यक्ष विजय अवधिया, उपाध्यक्ष मणिराज सिंह, विक्रम बढ़ोलिया, संयुक्त सचिव मुकेश श्रीवास्तव, दिनेश शर्मा, अनिल बढ़ोलिया, जिला मीडिया प्रभारी मनोज सोनी, सह सचिव दीपक बढ़ोलिया, राजेश गुप्ता सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन जागेगा या सिविल अस्पताल यूं ही अव्यवस्थाओं और अनैतिक गतिविधियों का केंद्र बना रहेगा।

