“मन के हारे हार है और मन के जीते जीत”

(विजयराघवगढ़) मन की शक्ति, सफलता प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण मंत्रों में से एक है।अनुकूल परिस्थिति में प्रसन्नता, प्रतिकूल परिस्थिति में दुख होता है और मन:स्थिति में परिवर्तन हो जाता है। प्रतिकूल परिस्थिति में निराशा, हीन भावना तनाव आता है, जिससे अनेक घटनायें घटित होती हैं।आत्महत्या जैसी भयावह स्थिति पैदा हो जाती है।

श्री राम को दशरथ ने राज्य देने की घोषणा की तो हर्ष नहीं, वनवास दिया तो विषाद नहीं। सचमुच यह तभी संभव है यदि व्यक्ति राम हो। राम अर्थात अपने आप में रमण करने वाला। गौतम बुद्ध ने कहा है,”किसी बाहरी शक्ति में इतनी ताकत नहीं कि वह हमारे मन को काबू कर सके और जब हम इस बात को समझ जाते हैं तो हम स्वतंत्र हो पाते हैं।

मन के पास “अनन्त शक्ति” है, लेकिन जिसका मन हार मान लेता है, फिर चाहे दुनिया के कितने भी साधन और शक्ति उसके पास क्यों न हो, वह अवश्य पराजित हो जाता है।
इसलिए हर पल सकारात्मक और यथार्थ में रहने की आवश्यकता होती है, क्योंकि “मन के हारे हार है और मन के जीते जीत।”

🙏🏾जय हिन्द 🙏🏾
पण्डित सुरेन्द्र दुबे विजयराघवगढ़

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