भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 8.4 अरब डॉलर पार, निजी क्षेत्र के खुलते ही 400 के करीब स्टार्ट-अप सक्रिय: डॉ. जितेंद्र सिंह

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(नई दिल्ली) | राज्यसभा केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा अंतरिक्ष डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था अब लगभग 8.4 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है। निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खोले जाने के बाद देश में इस समय करीब 399 अंतरिक्ष स्टार्ट-अप सक्रिय हैं, जो लॉन्च वाहन, उपग्रह, प्रणोदन प्रणाली और अंतरिक्ष-ग्रेड इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं।

डॉ. सिंह ने बुधवार को राज्यसभा में एक तारांकित प्रश्न के उत्तर में कहा कि यह उल्लेखनीय विस्तार वर्ष 2019 के बाद लिए गए नीतिगत सुधारों का परिणाम है, जिनके तहत अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को अनुमति दी गई। उन्होंने बताया कि इस दिशा में एक बड़ा संस्थागत बदलाव IN-SPACe की स्थापना रही, जो निजी उद्योग और ISRO सहित सरकारी एजेंसियों के बीच सिंगल-विंडो इंटरफेस के रूप में कार्य करता है।

मंत्री ने कहा कि भारत में वैज्ञानिक क्षमता और ISRO की प्रतिबद्धता हमेशा से मजबूत रही है, लेकिन पहले अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र के अभाव में औद्योगिक भागीदारी सीमित थी। हालिया सुधारों ने निजी निवेश और उद्यमिता के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।

उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष स्टार्ट-अप्स की संख्या जो कभी एक अंक तक सीमित थी, वह अब बढ़कर 399 तक पहुंच गई है। वर्तमान में भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का मूल्यांकन लगभग 8.4 अरब डॉलर है, जो अगले 8 से 10 वर्षों में चार से पांच गुना बढ़कर 40–45 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है।

डॉ. सिंह ने बताया कि अब निजी कंपनियां अंतरिक्ष मूल्य श्रृंखला के कई क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। Hindustan Aeronautics Limited (HAL) ने ISRO के साथ स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा कई भारतीय कंपनियां उपग्रह प्लेटफॉर्म, लॉन्च सिस्टम, प्रणोदन तकनीक और संबंधित अनुप्रयोगों पर कार्य कर रही हैं।

विदेशी उपग्रह प्रक्षेपण से होने वाली आय का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि अब तक ISRO द्वारा प्रक्षेपित 434 विदेशी उपग्रहों में से 399 उपग्रह वर्ष 2014 के बाद लॉन्च किए गए हैं। इन प्रक्षेपणों से भारत को लगभग 323 मिलियन यूरो और 233 मिलियन अमेरिकी डॉलर का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

अपने वक्तव्य के समापन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र को भारत की भविष्य की आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख स्तंभ माना जा रहा है। निजी निवेश और संस्थागत ढांचे के सशक्त होने से यह क्षेत्र अब नवाचार, विनिर्माण और उद्यमिता का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।

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