मानव जीवन एक यात्रा और इसे सफलता से जीना एक कला…!

(विजयराघवगढ़) मानव जीवन एक यात्रा के समान है और इसे सफलता से जीना एक कला है। जो व्यक्ति जीने की कला को जाने बिना जीवन को व्यर्थ ही करते हैं, इसीलिए जीवन जीने की कला को समझना बहुत आवश्यक है।

वास्तव में सफलता और प्रसन्नता के रहस्य जीवन जीने के इसी कला में निहित होते हैं। जो लोग विकट से विकट असमान्य परिस्थितियों में भी जिंदादिली के साथ जीवन जीते हैं और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रयासरत रहते हैं तो समझ लीजिए उन्होंने जीवन जीना सीख लिया है।

सुख-दुख तो आते रहते हैं। जो मनुष्य सुख-दुख में स्वयं को समान रख सके, वही वास्तव में जीना जानता है। सुख में तो सभी सुखी रहते हैं,जो दुख में रहकर भी स्थिर रहे तो वह कितनी प्रतिकूल स्थिति का सहजता से सामना कर सकता है। प्राय: जीवन में हर तरफ से दुखों और तकलीफों से घिरने के बाद भी सकारात्मक भाव रखते हुए यह विश्वास बनाए रखना कि सब ठीक हो जाएगा, हमे कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है।

अच्छा जीवन जीने के लिए हमारे ‘विचार’ अच्छे होने चाहिए, क्योंकि मनुष्य के जैसे ‘विचार’ होते हैं, वैसी ही उसकी ‘प्रवृत्ति’ बनती है।

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