छिंदवाड़ा हादसा: लापरवाही और दबाव की राजनीति का परिणाम — जीतू पटवारी
(भोपाल) मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी छिंदवाड़ा पहुँचे, जहाँ उन्होंने मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से लौटते समय हुई भीषण सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से भेंट कर गहरी शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं एवं दिवंगत आत्माओं को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवारों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें।

श्री पटवारी ने अस्पताल पहुँचकर दुर्घटना में घायल हुए लोगों से मुलाकात की और उनका कुशलक्षेम जाना। उन्होंने सभी घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। इस अवसर पर विधायकगण सोहन वाल्मीकि , निलेश उइके, सुनील उइके, विजय चौरे , सुजीत चौधरी , जिला कांग्रेस प्रभारी सुनील जायसवाल एवं जिला कांग्रेस अध्यक्ष विश्वनाथ ओकटे सहित अन्य कांग्रेसजन उपस्थित रहे।

श्री पटवारी ने कहा कि छिंदवाड़ा की यह घटना अत्यंत दुखद एवं पीड़ादायक है। यह केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि सरकार की लापरवाही, अव्यवस्था और जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को डराकर एवं दबाव बनाकर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शामिल किया गया। महिलाओं को ₹1500 रुपये का प्रलोभन और दबाव देकर सभा में ले जाया गया, जिसके परिणामस्वरूप यह दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें 10 से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई और कई लोग घायल हो गए।

श्री पटवारी ने कहा कि हादसे के बाद भी मुख्यमंत्री का रवैया संवेदनहीन रहा और पीड़ित परिवारों को न तो उचित मुआवजा दिया गया और न ही पर्याप्त राहत प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा में इससे पूर्व भी कथित रूप से सिरप पीने से 26 बच्चों की मौत का मामला सामने आया था, जो प्रशासनिक लापरवाही की गंभीर तस्वीर पेश करता है। ऐसे मामलों में ठोस कार्रवाई का अभाव चिंता का विषय है।

श्री पटवारी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाया गया कि वे निर्धारित संख्या में महिलाओं को लेकर आएं, अन्यथा उनको नौकरी से हटा दिया खड़ा जाएगा। इसी प्रकार, एक स्कूल सहायिका को भी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए चेतावनी दी गई।
ये घटनाएँ यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या सरकारी कार्यक्रमों के लिए इस तरह का दबाव बनाना उचित है? क्या आम लोगों और कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान की कोई अहमियत नहीं रह गई है?
