मंदसौर की महिलाओं ने रची सफलता की नई कहानी: गांव से महानगर तक ‘महाराणा समूह’ की मिठास

पिपल्या कराड़िया की महिलाओं ने बनाया आत्मनिर्भरता का मॉडल, रोजगार के नए अवसर भी सृजित

(मंदसौर) मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के ग्राम पिपल्या कराड़िया की महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। ‘महाराणा स्व-सहायता समूह’ ने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर रोजगार सृजन का भी प्रभावी मॉडल विकसित किया है।

प्रदेश में ग्रामीण आजीविका मिशन की सक्रिय पहल के तहत इस समूह की महिलाओं ने संगठित होकर एक छोटे व्यवसाय की शुरुआत की, जो आज सफल उद्यम के रूप में स्थापित हो चुका है। समूह की महिलाएं प्राकृतिक और पारंपरिक स्वाद वाले जूस और शेक तैयार कर रही हैं, जिन्हें बाजार में अच्छी पहचान मिल रही है।

इन उत्पादों में लेमन, जीरा, जिंजर लेमन, कच्ची केरी और आंवला जूस के साथ-साथ मिल्क शेक, बादाम शेक, राजभोग और शाही गुलाब शेक जैसे विकल्प शामिल हैं। गुणवत्ता और स्वाद के कारण इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।

सरकारी सहयोग से मिली मजबूती

समूह को आगे बढ़ाने में वित्तीय सहायता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत समूह को बैंक ऋण, सामुदायिक निवेश निधि और चक्रीय निधि के रूप में आर्थिक सहयोग प्रदान किया गया, जिससे व्यवसाय को विस्तार देने में मदद मिली।

इस समर्थन ने महिलाओं को न केवल संसाधन उपलब्ध कराए, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी दिया।

स्थानीय से राष्ट्रीय पहचान तक का सफर

‘महाराणा स्व-सहायता समूह’ ने अपने उत्पादों को स्थानीय बाजार से आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया है। उज्जैन, भोपाल, दिल्ली, नोएडा, सूरत, बड़ौदा, चंडीगढ़ और गुरुग्राम जैसे शहरों में आयोजित मेलों में भाग लेकर समूह ने अपनी अलग पहचान बनाई है।

यह विस्तार दर्शाता है कि ग्रामीण स्तर पर शुरू हुआ यह प्रयास अब बड़े बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता रखता है।

आर्थिक सशक्तिकरण और रोजगार का जरिया

समूह की महिलाएं प्रति माह लगभग 25 से 30 हजार रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं, जिससे वार्षिक आय करीब 4 लाख रुपये तक पहुंच रही है। इस पहल से जहां समूह की 10 महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं, वहीं अन्य लोगों को भी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।

महिला सशक्तिकरण की व्यापक तस्वीर

मध्यप्रदेश में महिलाओं की भागीदारी विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

दीदी कैफे, होम-स्टे संचालन, लघु उद्योगों और अन्य सेवाओं में महिलाओं की सक्रिय भूमिका दिखाई दे रही है। इसके साथ ही शिक्षा, खेल और अन्य क्षेत्रों में भी महिलाएं लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रही हैं।

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