बिजली कंपनी में निलंबन का ड्रामा! एक दिन सस्पेंड, दूसरे दिन बहाल — शिवम पाण्डेय ने उठाए बड़े सवाल

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(मैहर) बिजली कंपनी में जारी दो विभागीय आदेशों ने प्रशासनिक पारदर्शिता और एस ई सतना प्रशांत सिंह की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले आदेश में बिना पूर्व सूचना अवकाश पर जाने के आरोप में एक कनिष्ठ अभियंता (संविदा) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, लेकिन महज एक-दो दिन के भीतर दूसरा आदेश जारी कर उसी निलंबन को समाप्त करते हुए सेवा बहाल कर दी गई।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रदेश युवक कांग्रेस के प्रदेश सचिव शिवम पाण्डेय ने एस ई प्रशांत सिंह की भूमिका पर तीखा हमला बोलते हुए इसे सस्पेंशन और बहाली का खेल बताया है।उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कर्मचारी की गलती गंभीर थी, तो इतनी जल्दी बहाली क्यों कर दी गई, और यदि मामला गंभीर नहीं था तो तत्काल निलंबन किस आधार पर किया गया? क्या यह अनैतिक प्रेसर नहीं है क्या मनसा लाभांश लेने की नजर नहीं आती ?

शिवम पाण्डेय ने आरोप लगाया कि विभाग में अनुशासनात्मक कार्रवाई के नाम पर एस ई द्वारा अधिकारों का दुरुपयोग किया जा रहा है। छोटे कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई कर दबाव बनाया जाता है, जबकि बाद में अंदरूनी स्तर पर आदेश बदल दिए जाते हैं। इससे यह आशंका मजबूत होती है कि विभाग के भीतर निलंबन और बहाली के बीच किसी प्रकार की मिलीभगत या प्रभाव का खेल चल रहा है।

उन्होंने कहा कि बिना सूचना दो दिन की छुट्टी पर जाना अनुशासनहीनता हो सकती है, लेकिन हर स्थिति में तत्काल निलंबन उचित नहीं माना जा सकता। पारिवारिक आपातकाल, स्वास्थ्य संबंधी समस्या, परिवार मे शादी या आकस्मिक दुर्घटना या आपदा जैसी परिस्थितियों में कर्मचारी अचानक अवकाश लेने को मजबूर हो सकता है। ऐसे मामलों में विभागीय संवेदनशीलता जरूरी है।

प्रदेश सचिव ने कहा कि वर्तमान समय में ऑनलाइन अवकाश प्रणाली लागू है। यदि कर्मचारी ने आवेदन किया हो और प्रशासनिक स्तर पर स्वीकृति लंबित रही हो, तो पहले तथ्यों की जांच होनी चाहिए। बिना समुचित परीक्षण के कठोर कार्रवाई छोटे कर्मचारियों को मानसिक दबाव और अवसाद की स्थिति में धकेल सकती है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभाग में स्थानांतरण और पदस्थापना को लेकर भी निष्पक्षता दिखाई नहीं दे रही। हाल ही में सहायक अभियंता नियमित पदस्थ अधिकारी का स्थानांतरण कर लंबे समय से एक ही क्षेत्र में जमे जुनियर अधिकारियों को प्रभारी बनाकर संरक्षण देने जैसे निर्णयों ने विभागीय कार्यप्रणाली को संदेह के घेरे में ला दिया है। गुणवत्ता रहित सेवाओं लेने के लिए आम उपभोक्ता भी मजबूर हो रहा है ।

शिवम पाण्डेय ने कहा कि मैहर क्षेत्र में वर्षों से पदस्थ अधिकारियों को स्थानांतरण से बचाया जा रहा है, जबकि कम समय में आए अधिकारियों को हटाया जा रहा है। इससे विभाग में समान अवसर और प्रशासनिक संतुलन प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक (एमडी) से मांग की कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। केवल हालिया निलंबन और बहाली आदेश ही नहीं, बल्कि ऐसे सभी पुराने आदेशों की भी समीक्षा होनी चाहिए जिनमें अल्प समय में कार्रवाई और राहत दी गई हो।

प्रदेश युवक कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि विभागीय निर्णयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई, तो कर्मचारियों का विश्वास प्रशासन से उठ सकता है। विभागीय अनुशासन आवश्यक है, लेकिन नियमों की आड़ में मनमानी और दबाव की राजनीति स्वीकार नहीं की जा सकती।

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