डॉ. मनीषा मिश्रा (सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना एवं गुरु) कथक नृत्य में झलकी संस्कृति और साधना

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(मुंबई) भारत हमेशा से ही अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता रहा है. जहाँ शास्त्रीय नृत्य जैसी कला का प्रदर्शन भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग हैं और आज इस पोस्ट के ज़रिए हम भारत के सभी शास्त्रीय नृत्यों का विवरण करेंगे। ऐसा माना जाता है कि समस्त शास्त्रीय नृत्य की उत्पत्ति मंदिरों में हुई, जहाँ पूजा करना मुख्य उद्देश्य था हालांकि सभी नृत्य अलग- अलग क्षेत्रों से विकसित हुए हैं, जिनकी जड़े समान हैं।वहीं संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रकाश में नौ प्रकार के भरतनाट्यम , कथक ,कथकली, ओडिसी, कुचिपुड़ी, मोहिनीअट्टम, मणिपुरी , सत्त्रिया , छाऊ शास्त्रीय नृत्य को मान्यता दी गई है। समय के साथ कलाकारों ने कई शास्त्रीय नृत्यों में मौलिकता को जीवित रखते हुए कुछ चीजें और भी समाहित की, विशेष रूप से कथक में,जिसके परिणाम वर्तमान समय में देखे जा सकते हैं, आज भारतीय शास्त्रीय नृत्य पूरे विश्व में काफी लोकप्रिय नृत्य है।

इसी क्रम में जब कथक शैली की बात करते हैं तो उत्तर भारत की डॉ.मनीषा मिश्रा जी का नाम बहुत सम्मान से लिया जाता है। डॉ. मनीषा मिश्रा अपनी पीढ़ी की भारत की अग्रणी कथक कलाकारों में से सबसे प्रशंसित कलाकारों में से एक हैं, जो अपनी असाधारण तकनीकी, दक्षता और गहन कलात्मक अभिव्यक्ति के लिए जानी जाती हैं। 03.12.1982 वाराणसी, उत्तर प्रदेश में जन्मीं डॉ. मनीषा मिश्रा ने उस वातावरण में शिक्षा प्राप्त की, जहाँ आज भी उच्च शिक्षा तक पहुंचना इस विधा में एक बड़ी चुनौती माना जाता है। डॉ. मनीषा मिश्रा ने,लखनऊ,उत्तर प्रदेश में निवास करते हुए कथक नृत्य में पी.एच.डी. जैसी उच्च डिग्रियां प्राप्त के चुकी हैं,जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। लखनऊ और बनारस घराने की युवा पीढ़ी की एक विशिष्ट प्रतिनिधि के रूप में, उन्होंने भारत और विश्व भर में अपनी जीवंत मंचीय उपस्थिति के माध्यम से एक अद्वितीय पहचान बनाई है।

बनारस के प्रतिष्ठित घरानेदार संगीत- नृत्य परम्परा से संबद्ध मनीषा को कला परम्परा विरासत में प्राप्त हुई है। आप तबला के वरिष्ठ गुरु एवं विद्वान तबला पारंगत स्व. पंडित बद्री महाराज जी की सुपौत्री एवं देश के ख्याति प्राप्त, चर्तुमुखी तबला वादक व वरिष्ठ गुरु पंडित रविनाथ मिश्रा जी एवं श्रीमती शशि मिश्रा जी की सुपुत्री हैं। नृत्य की प्रारम्भिक शिक्षा-दीक्षा आपने अपने पूज्य पिता जी के कुशल निर्देशन एवं संरक्षण में प्राप्त की, तत्पश्चात् कथक नृत्य की उच्च शिक्षा एवं मार्गदर्शन गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत वरिष्ठ गुरु एवं प्रख्यात कथक नर्तक स्व. पंडित अर्जुन मिश्रा जी के सानिध्य में ‘गण्डाबंध शिष्या’ के रुप में ग्रहण कर, अपने गंभीर चिंतन के साथ अपनी कला को संवारा है। इनके नृत्य में नवीन सृजनात्मकता लाने का प्रयास, प्रत्येक प्रदर्शन मे कुछ नये प्रयोग करने की इच्छा, भाव की माधुर्यता, किसी चरित्र की उपयुक्त भूमिका, नृत्य में रसानुभूति एवं सौंदर्यबोध की क्षमता और ताल छंदों की विविधता का अनुपम संगम देखने को मिलता है। इनकी शैली “उपज” नृत्त और नृत्य अंगों के एक विशिष्ट मिश्रण को दर्शाती है, जो परंपरा को आधुनिक संवेदनशीलता से जोड़ता है। वह कथक के मूल सौंदर्यशास्त्र का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं, साथ ही उसमें अपनी समकालीन व्याख्या भी जोड़ती हैं, जिससे प्रत्येक प्रदर्शन एक गहन और अविस्मरणीय अनुभव बन जाता है।

एक एकल कलाकार के रूप में, डॉ. मनीषा अपनी जीवंत ऊर्जा, त्रुटिहीन पद-संचालन और अभिव्यंजक आँखों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। शास्त्रीय परंपरा में गहरी जड़ें जमाए हुए, वह परंपरागत एवं समकालीन विचारों को अपनी कलात्मक
अभिव्यक्ति में सहजता से समाहित करती हैं, जिससे वह भारतीय शास्त्रीय नृत्य के संसार में एक सशक्त और मार्गदर्शक उपस्थिति बन जाती हैं। अपने कार्य के माध्यम से, उनका उद्देश्य न केवल सम्मोहक कलात्मक आख्यान प्रस्तुत करना है, बल्कि नर्तकों की अगली पीढ़ी का पोषण करना भी है,जिसके अंतर्गत वह कठोर शारीरिक प्रशिक्षण के साथ-साथ मुक्त और जिज्ञासु सोच को भी बढ़ावा देती हैं।

आपकी उत्कृष्ट नृत्य प्रतिभा के फलस्वरुप आपको सन्‌ 2002 में भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय छात्रवृत्ति एवं सन्‌ 2015-16 में नृत्य
फेंलोशिप प्रदान की गई है। अपनी कला की अपूर्व साधना के फलस्वरुप आपको सन्‌ 1994 में उ.प्र. के तत्कालीन राज्यपाल महामहिम श्री मोतीलाल बोरा जी, सन्‌ 1996 में बिहार के राज्यपाल महामहिम श्री सुंदर सिंह भण्डारी जी, सन्‌ 2000 में उ. प्र.के पूर्व राज्यपाल महामहिम श्री सूरजभान जी तथा सन्‌ 1999 में गोवा के तत्कालीन मुख्यमंत्री माननीय श्री प्रताप सिंह राणे जी के कर कमलों द्वारा समानित किया गया है। इसके अतिरिक्त आपको ‘नृत्य श्रृंगारमणि’, ‘कथक श्री, ‘कथक निपुण’, ‘संगीत कला रत्न, ‘संगीत पांचाल गौरव सम्मान’, ‘डॉ. अखिलेश दास संस्कृति सम्मान’, गोस्वामी तुलसीदास सेवा साधना सम्मान’, ‘पंडित बद्री महाराज सम्मान’,
‘प्रतिभा दर्शन सामान’, ‘समय सम्मान’, ‘विश्वनाथ राव दादा माफीदार अलंकरण सम्मान’, ‘संगीत सेवालय प्रंशसा पत्र’, बैटरी डांस
कम्पनी, (न्यूयार्क), ‘म्यूज़िका इंडियाना’ (यूरोप), यूनिवर्सिटी ऑफ विजुअल एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स (श्रीलंका) एवं गायकी इंडियन
क्लासिकल म्यूजिक अकेडमी (श्रीलंका) इत्यादि द्वारा सम्मानित, प्रशंसा पत्र, उपाधियों एवं सम्मान से अलंकृत किया गया है।

आपने भारत के अनेकों प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय संगीत सम्मेलनों एवं विदेशों, जैसे इटली, स्वीटजरलैण्ड, पेरिस, श्रीलंका आदि
में आयोजित अनेकों प्रतिष्ठित संगीत समारोहों में अपनी सफल सांगीतिक प्रस्तुति दी है एवं कई समारोहों में राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त महान कलाकारों के साथ सांस्कृतिक रंगमंच सांझा करने का गौरव भी प्राप्त किया है। आपने एकल नृत्य के साथ ही युगल नृत्य एवं कई समूह नृत्य-संरचनायें (कॉरियोग्राफी) भी की है। साथ ही, डाक्यूमेन्ट्री फिल्मों तथा कुछ धारावाहिकों में भी कार्य किया है, जो आपकी बहुमुखी प्रतिभा का परिचायक है। आप प्रसार भारती-दूरदर्शन एवं भारतीय सांस्कृतिक सम्बद्ध परिषद (आई.सी.सी.आर,) नई दिल्‍ली
की चयनित कलाकार है। आपके कई प्रतिष्ठित संगीत पुस्तकों में नृत्य-संगीत सम्बन्धित लेख प्रकाशित हुए हैं। आपके विश्वविद्यालय
अनुदान आयोग, नई दिल्‍ली एवं अन्य संस्थानों द्वारा आयोजित विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में शोध-पत्र प्रस्तुत हुए है। आप
कई संस्थानों की प्रायोगिक एवं लिखित परीक्षक भी है एवं अनेकों कथक प्रतिस्पर्धाओं में निर्णायक की भूमिका निभाई है। अपनी 40 वर्षों की सफल सांगीतिक साधना यात्रा सहित, विगत 25-26 वर्षों से कथक नृत्य के अनेकों भारतीय एवं विदेशी छात्र-छात्राओं को शिक्षा प्रदान कर कथक नृत्य के प्रचार-प्रसार में संलग्न है। आपने कथक नृत्य के क्षेत्र में ‘डॉक्टरेट’ की उपाधि ‘कथक नृत्य में रसानुभूति एवं सौंदर्य-बोध’ विषय पर प्राप्त की है।
डॉ. मनीषा मिश्रा ‘संगीतम्‌ – द इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स’ की ‘सचिव’ के रुप में कार्यरत हैं और ‘मनीषा मिश्रा डांस कंपनी’ की संस्थापक तथा कलात्मक निदेशक भी हैं। वे प्रतिवर्ष भव्य सांगीतिक समारोह एवं संगीत-नृत्य की परिचर्चा आयोजित करवाती हैं। उनका मुख्य उद्देश्य शास्त्रीय परंपरा को संरक्षित रखते हुए उसमें नवीनता को अपनाना है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि
‘कथक की शाश्वत सुंदरता आने वाली पीढ़ियों’ तक गूंजती रहे।

प्रतिष्ठित कुल की वधु, प्रसिद्ध शास्त्रीय-उपशास्त्रीय गायक श्री ‘प्रवीण कश्यप मिश्र’ जी की धर्मपत्नी एवं चर्चित युवा-तबलावादक एवं
विलक्षण गुण सम्पन्न ‘आराध्य प्रवीण’ की माँ, के लिए कथक प्राण वायु, रंगमंच पूजा स्थल एवं रसिक-दर्शक ईश्वर समान है, आपका पूर्ण जीवन विधा का आत्मसात करने एवं संकलित विधा को अध्ययन, अनुभव एवं अनुसंधान के साथ अग्रिम पीढ़ी को हस्तान्तरित करते हुए, कथक के प्रचार-प्रसार में समर्पित कर देना है।

✍️ संजीव भागीरथी पांडे
          महाराष्ट्र प्रमुख
     RPKP INDIA NEWS

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