ओबीसी छात्रों की दिल्ली में पढ़ाई हुई आसान; दिल्ली छात्रगृह योजना का बढ़ा दायरा, सहायता राशि में 6.5 गुना की हुई बढ़ोत्तरी

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में सशक्त हो रहा ओबीसी वर्ग : राज्यमंत्री श्रीमती गौर
2026-27 में 150 नए और पुराने विद्यार्थियों पर खर्च होंगे 1.80 करोड़, तीसरे वर्ष 300 विद्यार्थियों पर खर्च होंगे 3.60 करोड़

(भोपाल) मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में ओबीसी वर्ग के कल्याण और उनके शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार निरंतर ऐतिहासिक कदम उठा रही है। इसी कड़ी में, कैबिनेट ने 2005 से संचालित ‘दिल्ली छात्रगृह योजना’ में महत्वपूर्ण बदलावों को मंज़ूरी दी है। इसके तहत छात्रों को मिलने वाली सरकारी सहायता राशि को 1,550 रुपए प्रतिमाह से बढ़ाकर 10,000 रुपए प्रतिमाह कर दिया गया है। अब इन विद्यार्थियों को आवासीय और भोजन व्यवस्था के लिए सालाना 1 लाख 20 हजार रुपए की राशि दी जाएगी।

सहायता राशि के साथ-साथ योजना का दायरा बढ़ाते हुए लाभार्थियों की संख्या में भी वृद्धि की गई है। पहले जहां इस योजना के तहत प्रतिवर्ष अधिकतम 50 छात्रों को ही लाभ मिलता था, वहीं अब हर साल 100 नए विद्यार्थियों (50 स्नातक और 50 स्नातकोत्तर) को इस योजना में शामिल किया जाएगा।

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने इस निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव के यशस्वी नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूल मंत्र पर कार्य कर रही है। सबसे अच्छी बात यह है कि जो विद्यार्थी पहले से वहां पढ़ रहे हैं, उन्हें भी उनके कोर्स की बची हुई अवधि तक इस बढ़ी हुई राशि का लाभ मिलता रहेगा। यह ऐतिहासिक निर्णय हमारे ओबीसी छात्र-छात्राओं के सपनों को नई उड़ान देगा और उन्हें बिना किसी आर्थिक चिंता के अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करने में मदद करेगा।

किसे और कैसे मिलेगा योजना का लाभ?

विद्यार्थियों को ‘पिछड़ा वर्ग मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति’ प्राप्त करने की पात्रता होनी चाहिए। उनके माता-पिता या अभिभावक की वार्षिक आय ‘पिछड़ा वर्ग मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति विनियम, 2013 (यथा संशोधित-2018)’ के प्रावधानों के अनुरूप होनी चाहिए। इस संशोधित योजना में नए विद्यार्थियों के प्रवेश के अलावा, पूर्व से अध्ययनरत विद्यार्थियों को भी उनके शेष पाठ्यक्रम की अवधि तक नवीनीकरण का लाभ दिया जाएगा। योजना पर प्रथम वर्ष यानी 2026-27 में नए और पुराने 150 विद्यार्थियों के लिए 1.80 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। वहीं, चौथे वर्ष (2029-30) तक जब यह योजना पूरी तरह लागू हो जाएगी, तब कुल 300 विद्यार्थियों के लिए सरकार सालाना 3.60 करोड़ रुपए खर्च करेगी।

राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि ‘दिल्ली छात्रगृह योजना’ में किया गया यह अभूतपूर्व बदलाव इसी ठोस संकल्प का प्रमाण है कि सरकार ओबीसी वर्ग के छात्र-छात्राओं के भविष्य को लेकर सजग है। ये बदलाव दर्शाते हैं कि राज्य सरकार ओबीसी वर्ग को समान अवसर प्रदान कर उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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