किसानों के नाम पर उत्सव मना रही सरकार, खेतों में संघर्ष कर रहा अन्नदाता : कुणाल चौधरी

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(भोपाल) अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव कुणाल चौधरी ने प्रदेश सरकार पर किसानों के साथ छल, झूठे प्रचार और अव्यवस्थित गेहूं खरीदी को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए श्री चौधरी ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार किसानों के नाम पर ढोल-ताशे और उत्सव मना रही है, जबकि जमीन पर किसान परेशान, अपमानित और आर्थिक संकट से जूझ रहा है।

इस अवसर पर मध्यप्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक, प्रवक्ता राहुल राज, रितेश त्रिपाठी एवं सुभाष जी उपस्थित रहे।

श्री चौधरी ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को “कृषि उत्सव” का वर्ष घोषित किया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि किसानों के खेतों में उत्सव नहीं बल्कि संघर्ष दिखाई दे रहा है। सरकार विज्ञापनों में किसानों की आय बढ़ने के दावे कर रही है, लेकिन किसान कर्ज, अव्यवस्था और सरकारी लापरवाही से टूट चुका है।

उन्होंने सरकार के हालिया विज्ञापनों का हवाला देते हुए कहा कि स्वयं सरकार दावा कर रही है कि प्रदेश में इस वर्ष 365.11 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन हुआ है। यदि इतना बड़ा उत्पादन हुआ है तो सरकार ने मात्र लगभग 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य क्यों रखा? बाकी किसानों का गेहूं आखिर कहां जाएगा? क्या सरकार किसानों को मजबूर करना चाहती है कि वे औने-पौने दामों में मंडियों में फसल बेच दें?

श्री चौधरी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीति और नियत दोनों किसान विरोधी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बड़े-बड़े विज्ञापन जारी कर अपनी पीठ थपथपा रही है, जबकि प्रदेशभर की खरीदी केंद्रों और सोसायटियों में किसान कई-कई दिनों से लाइन में खड़े हैं। किसानों को कभी कट्टियों की कमी का बहाना बताया जाता है, तो कभी वेयरहाउस भरे होने का। एक वेयरहाउस से दूसरे वेयरहाउस भटकाकर किसानों को परेशान किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि गेहूं की फसल फरवरी माह से तैयार होकर मंडियों में आने लगी थी और केंद्र सरकार द्वारा पहले ही प्रदेश को लगभग 78 लाख मीट्रिक टन खरीदी का कोटा मिल चुका था। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने समय पर खरीदी शुरू नहीं की और खरीदी प्रक्रिया 9 अप्रैल से प्रारंभ की गई। आज डेढ़ महीने से अधिक समय गुजरने के बाद भी सरकार केवल लगभग 73 लाख मीट्रिक टन गेहूं ही खरीद पाई है।

श्री चौधरी ने कहा कि सरकार स्वयं दावा कर रही है कि लगभग 19.4 लाख किसानों ने पंजीयन कराया और लगभग 160 लाख मीट्रिक टन गेहूं का पंजीयन हुआ। इसके बावजूद खरीदी की गति अत्यंत धीमी है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि 8 से 9 लाख किसान अभी भी खरीदी की प्रतीक्षा में हैं, तो सरकार 23 मई की अंतिम तिथि तक शेष गेहूं कैसे खरीदेगी?

उन्होंने कहा कि खरीदी केंद्रों पर स्थिति बेहद भयावह है। किसान 4-5 दिनों तक लाइन में लगे रहते हैं, लेकिन उनकी उपज नहीं खरीदी जाती। सरकार के पास न पर्याप्त भंडारण व्यवस्था है, न पर्याप्त कट्टियां और न ही भुगतान की स्पष्ट व्यवस्था। यह सीधा-सीधा किसानों को परेशान कर उन्हें निजी व्यापारियों के हाथों फसल बेचने के लिए मजबूर करने की साजिश है।

कुणाल चौधरी ने कहा कि भाजपा सरकार ने किसानों से पहले भी वादाखिलाफी की है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने किसानों से ₹2700 प्रति क्विंटल गेहूं खरीदने का वादा किया था, लेकिन वास्तविकता में किसानों को मात्र ₹40 बोनस देकर धोखा दिया गया। उन्होंने कहा कि यह किसानों के विश्वास के साथ खुला विश्वासघात है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने 28 मार्च को सोसायटी भुगतान की अंतिम तारीख तय कर किसानों पर 14 से 18 प्रतिशत तक की पेनल्टी का बोझ डाल दिया, जिससे किसान आर्थिक रूप से और अधिक परेशान हुआ है।

श्री चौधरी ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों के जख्मों पर मरहम लगाने के बजाय रोज विज्ञापनों के माध्यम से नमक छिड़कने का काम कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय कृषि मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बड़े-बड़े विज्ञापन प्रकाशित किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि किसान अपनी उपज बेचने के लिए दर-दर भटक रहा है।

खरीफ फसलों के समर्थन मूल्य बढ़ाने के विषय में बोलते हुए श्री कुणाल चौधरी ने कहा कि केवल MSP बढ़ाने की घोषणाएं करने से किसानों की स्थिति नहीं सुधरेगी। जब तक सरकार ईमानदारी से खरीदी, भुगतान, भंडारण और बाजार व्यवस्था सुनिश्चित नहीं करेगी, तब तक किसान को वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार किसानों को आंकड़ों और विज्ञापनों के जरिए भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। आंकड़ों में किसान अमीर दिखाया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता में किसान कर्ज में डूबा हुआ है।

अंत में श्री कुणाल चौधरी ने मांग की कि प्रदेश सरकार तत्काल गेहूं खरीदी की अवधि बढ़ाए, सभी पंजीकृत किसानों की उपज खरीदे, पर्याप्त कट्टियों एवं भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित करे तथा किसानों को समय पर भुगतान उपलब्ध कराए। अन्यथा कांग्रेस पार्टी किसानों के हक की लड़ाई सड़क से सदन तक मजबूती से लड़ती रहेगी।

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