कटनी जिले में पशु तस्करी पर सवाल: सूचना के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
बरही-विजयराघवगढ़ क्षेत्र में जिम्मेदारों की भूमिका पर उठे गंभीर प्रश्न
बरही/विजयराघवगढ़। कटनी जिले के बरही एवं विजयराघवगढ़ क्षेत्र में कथित रूप से संचालित पशु तस्करी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार क्षेत्र से सप्ताह में दो से तीन दिन बकरों एवं बकरियों से भरे ट्रक खुलेआम मुख्य मार्गों से गुजरते हैं, लेकिन इसके बावजूद संबंधित विभागों द्वारा प्रभावी जांच और कार्रवाई नहीं किए जाने के आरोप लग रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर स्थानीय प्रशासन तक को इन वाहनों की आवाजाही की जानकारी दी जा चुकी है। इसके बावजूद स्थिति में कोई विशेष बदलाव दिखाई नहीं देता। लोगों का आरोप है कि सूचना देने के बाद भी संबंधित अधिकारी केवल “देखते हैं” कहकर मामला टाल देते हैं और वाहन आसानी से अपने गंतव्य तक पहुंच जाते हैं।
सबसे अधिक चर्चा उस घटना को लेकर है जिसमें कथित रूप से पशुओं से भरा एक ट्रक आगे चल रहा था और उसके पीछे डायल-112 वाहन भी दिखाई दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ दूरी बाद डायल-112 वाहन रुक गया जबकि पशुओं से भरा ट्रक बिना किसी रोक-टोक के थाना क्षेत्र से गुजर गया। इस घटना के बाद लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में पशुओं का परिवहन प्रशासन की नजरों से कैसे बच जाता है।
सूत्रों का दावा है कि बरही क्षेत्र के छिंदिया और तैयब नगर सहित विजयराघवगढ़ क्षेत्र के सिनगोड़ी इलाके से बड़े पैमाने पर बकरों एवं बकरियों की लोडिंग की जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन चाहे तो इन स्थानों पर निगरानी बढ़ाकर पूरे नेटवर्क की जानकारी आसानी से जुटा सकता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब आम नागरिकों को इन गतिविधियों की जानकारी है तो जिम्मेदार विभागों तक यह जानकारी क्यों नहीं पहुंचती, और यदि पहुंचती है तो कार्रवाई क्यों नहीं होती।
इधर क्षेत्र में एक और चर्चा जोर पकड़ रही है। सूत्रों के अनुसार हाल ही में एक चार पहिया वाहन में कुछ कथित कारोबारी क्षेत्र में घूमते हुए देखे गए। चर्चा है कि इस पूरे नेटवर्क का एक प्रमुख व्यक्ति बरही क्षेत्र से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है, जबकि कुछ अन्य लोग बाहरी क्षेत्रों के बताए जा रहे हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कथित कारोबार से जुड़े कुछ लोगों के राजनीतिक संपर्क होने की वजह से कार्रवाई प्रभावित हो सकती है।
हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी क्षेत्र में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि यदि किसी भी प्रकार का अवैध परिवहन या पशु तस्करी हो रही है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच कराए, सीसीटीवी फुटेज खंगाले, टोल नाकों एवं प्रमुख मार्गों की निगरानी बढ़ाए और सूचना देने वालों की शिकायतों को गंभीरता से ले तो पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है। जनता अब यह जानना चाहती है कि आखिर सूचना मिलने के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी।
यदि आरोप सही हैं तो यह केवल अवैध पशु परिवहन का मामला नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न है। वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन को जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि क्षेत्र में फैल रही चर्चाओं और आशंकाओं पर विराम लग सके।
✍️ नीरज तिवारी
RPKP INDIA NEWS
बरही
