बरही थाना की शांति समिति बैठकों पर उठे सवाल: क्या सौहार्द की बैठकों पर हावी हो रही राजनीति? विपक्ष की उपेक्षा के आरोप, पारदर्शिता की मांग तेज
बरही। कटनी जिले के बरही थाना परिसर में त्योहारों के दौरान शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर समय-समय पर शांति समिति की बैठकें आयोजित की जाती हैं। इन बैठकों का उद्देश्य विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, व्यापारिक वर्ग, जनप्रतिनिधियों एवं समाज के प्रबुद्ध नागरिकों के साथ संवाद स्थापित कर क्षेत्र में सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखना होता है। लेकिन हाल के दिनों में इन बैठकों की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े होने लगे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि शांति समिति की बैठकें अब सर्वसमावेशी मंच के बजाय कथित रूप से गिने-चुने लोगों तक सीमित होती जा रही हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि सभी वर्गों एवं राजनीतिक दलों को समान रूप से आमंत्रित करने के बजाय चुनिंदा लोगों को बुलाकर औपचारिकताएं पूरी कर ली जाती हैं और बाद में कागजी कार्रवाई के माध्यम से बैठक संपन्न दर्शा दी जाती है।
विपक्ष की उपेक्षा का आरोप, कांग्रेस अध्यक्ष ने उठाए सवाल
नगर कांग्रेस अध्यक्ष मोहित शर्मा का कहना है कि बरही थाना परिसर में आयोजित होने वाली शांति समिति की बैठकों की सूचना विपक्षी पदाधिकारियों को नहीं दी जाती। उनका आरोप है कि बैठक में केवल गिने-चुने लोग ही मौजूद रहते हैं, जबकि क्षेत्र की समस्याओं और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने का काम विपक्ष भी करता है। ऐसे में विपक्ष की अनदेखी लोकतांत्रिक भावना के विपरीत है।
शांति समिति का उद्देश्य किसी एक विचारधारा का नहीं
जानकारों का मानना है कि शांति समिति जैसी बैठकों का उद्देश्य किसी एक दल, विचारधारा या समूह का प्रतिनिधित्व करना नहीं, बल्कि कांग्रेस, भाजपा सहित अन्य राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक प्रतिनिधियों, व्यापारियों, पत्रकारों एवं समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों को एक मंच पर लाकर त्योहारों के दौरान आवश्यक व्यवस्थाओं, स्थानीय समस्याओं और सुझावों पर चर्चा करना होता है।
राजनीतिक प्रभाव की चर्चा से उठ रहे बड़े सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि शांति समिति जैसी महत्वपूर्ण बैठकों में भी राजनीतिक प्रभाव और पक्षपात हावी होने लगेगा तो इनके मूल उद्देश्य पर ही प्रश्नचिन्ह लग जाएगा। शांति, भाईचारा और सामाजिक समन्वय से जुड़े मंच पर यदि किसी वर्ग या विचारधारा की उपेक्षा होती है तो इससे समाज में गलत संदेश जा सकता है।
पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग
क्षेत्र के लोगों ने अपेक्षा व्यक्त की है कि भविष्य में आयोजित होने वाली शांति समिति की बैठकों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए। कांग्रेस, भाजपा सहित सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, पत्रकारों, व्यापारिक वर्ग और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों को समान रूप से आमंत्रित किया जाए, ताकि शांति समिति वास्तव में समाज के हर वर्ग की समिति बन सके, न कि केवल औपचारिकता या किसी विशेष समूह तक सीमित मंच।
बड़ा सवाल
क्या शांति समिति जैसी सामाजिक सौहार्द और आपसी समन्वय से जुड़ी बैठकों में भी राजनीतिक प्रभाव हावी हो रहा है, या फिर प्रशासन भविष्य में सभी वर्गों को साथ लेकर निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावी संवाद की परंपरा को मजबूत करेगा?
✍️ नीरज तिवारी
RPKP INDIA NEWS
बरही
