बरही की शांति समिति बैठकें बनकर रह गईं औपचारिकता? वर्षों से उठ रहे मुद्दे, लेकिन धरातल पर नहीं दिख रहा समाधान

बरही। कटनी जिले के बरही थाना परिसर में आयोजित होने वाली शांति समिति की बैठकों को लेकर अब नगर के समाजसेवियों, व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों के बीच असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। लोगों का कहना है कि वर्षों से आयोजित हो रही इन बैठकों में केवल त्योहारों के दौरान शांति व्यवस्था की चर्चा ही नहीं होती, बल्कि नगर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था, सड़कों के दोनों किनारों पर बढ़ते अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और आम नागरिकों की समस्याओं जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे भी लगातार उठाए जाते रहे हैं, लेकिन इन चर्चाओं का परिणाम धरातल पर दिखाई नहीं देता।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बैठक में सुझाव लिए जाते हैं, समस्याओं पर लंबी चर्चा होती है, अधिकारियों द्वारा आश्वासन भी दिए जाते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद सब कुछ पहले जैसा हो जाता है। नगर की प्रमुख सड़कों पर बढ़ता अतिक्रमण, बाजार क्षेत्र में लगने वाला जाम और यातायात की अव्यवस्था आज भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है।

समाजसेवियों एवं कुछ जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि बैठकों में उठाए गए मुद्दों पर समयबद्ध कार्यवाही नहीं होती, तो ऐसी बैठकें केवल कागजी खानापूर्ति और औपचारिकता बनकर रह जाती हैं। उनका कहना है कि जनता अपनी समस्याएं लेकर प्रशासन के सामने पहुंचती है, सुझाव देती है, लेकिन जब उन सुझावों का कोई परिणाम सामने नहीं आता तो स्वाभाविक रूप से लोगों का विश्वास कमजोर होने लगता है।

कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों से जुड़े पदाधिकारियों का मानना है कि शांति समिति का उद्देश्य केवल त्योहारों में शांति बनाए रखना नहीं, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच संवाद स्थापित कर समस्याओं का समाधान निकालना भी है। यदि वर्षों से उठ रहे मुद्दे आज भी जस के तस हैं, तो यह स्थिति स्वयं कई सवाल खड़े करती है।

जनता के बीच उठ रहे सवाल
क्या शांति समिति की बैठकें केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं?

जब हर बैठक में अतिक्रमण और यातायात व्यवस्था का मुद्दा उठता है, तो स्थायी समाधान क्यों नहीं हो पा रहा?

क्या जनता और जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए सुझावों पर गंभीरता से अमल किया जा रहा है?

यदि समस्याएं जस की तस हैं, तो बैठकों में होने वाली चर्चाओं का वास्तविक उद्देश्य क्या है?

नगर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि भविष्य में भी बैठकों में केवल चर्चा और आश्वासन का सिलसिला चलता रहा और धरातल पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो लोगों की भागीदारी और प्रशासन के प्रति विश्वास दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

जनता की मांग है कि शांति समिति की बैठकों को केवल औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनमें उठाए गए मुद्दों पर समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, ताकि जनता को यह महसूस हो सके कि उनकी बात केवल सुनी ही नहीं जाती, बल्कि उस पर अमल भी होता है।

✍️ नीरज तिवारी
RPKP INDIA NEWS
बरही

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