संवेदनाएं बनीं संबल… टीबी मरीजों के साथ खड़ा हुआ जिला प्रशासन कलेक्टर श्री तिवारी स्वयं बने नि-क्षय मित्र, अब प्रशासन, उद्योग जगत और समाज मिलकर देंगे मरीजों को पोषण और नया जीवन
(कटनी) कभी समाज से दूरी और उपेक्षा झेलने वाली टीबी जैसी बीमारी के विरुद्ध अब कटनी में संवेदनाओं की नई मिसाल लिखी जा रही है। यहां इलाज के साथ-साथ अब मरीजों को अपनापन, पोषण और समाज का भरोसा भी मिलेगा। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत कलेक्टर श्री आशीष तिवारी की पहल ने इस जनस्वास्थ्य अभियान को केवल सरकारी योजना नहीं रहने दिया, बल्कि इसे जनसहभागिता का एक प्रेरक आंदोलन बना दिया है।
जिले को टीबी मुक्त कटनी बनाने के संकल्प के साथ कलेक्टर श्री तिवारी स्वयं ‘नि-क्षय मित्र’ बने हैं। उन्होंने यह संदेश दिया है कि टीबी से जूझ रहे मरीजों को केवल दवाइयों की नहीं, बल्कि पौष्टिक भोजन, सामाजिक सहयोग और मानवीय संवेदनाओं की भी उतनी ही आवश्यकता होती है। उनकी इस पहल ने प्रशासनिक अधिकारियों, उद्योगपतियों और विभिन्न विभागों को भी आगे आने के लिए प्रेरित करने का काम किया है । जिसके परिणामस्वरूप जिले में सेवा और सहयोग की एक नई श्रृंखला शुरू होने जा रही है।
कलेक्टर की पहल से प्रेरित होकर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) ने 35, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) ने 50, आबकारी विभाग ने 35, लोक निर्माण विभाग ने 50, खनिज विभाग ने 50, उद्योग विभाग ने 50, पीआईयू ने 25, एमपीईबी ने 25, खाद्य विभाग ने 25 तथा मध्यप्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम ने 35 टीबी मरीजों को पोषणयुक्त फूड बास्केट उपलब्ध कराने की स्वैच्छिक जिम्मेदारी ली है। इसके अलावा जिले की प्रत्येक जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा प्रत्येक तहसीलदार ने भी स्वेच्छा से 20-20 मरीजों को गोद लेकर इस पुण्य कार्य में सहभागी बनने का संकल्प लिया है।
बीते सोमवार को हुई समय-सीमा बैठक में सभी विभागों और अधिकारियों ने स्वेच्छा से जिला क्षय अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र दीवान को आवश्यक सहयोग राशि उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई है।योजना के तहत प्रत्येक टीबी मरीज को प्रतिमाह 600 रुपये मूल्य की पोषणयुक्त फूड बास्केट उपलब्ध कराई जाएगी। प्रारंभिक चरण में आगामी दो माह के लिए प्रति मरीज 1,200 रुपये की सहायता सुनिश्चित की गई है, ताकि उपचार के दौरान मरीजों को आवश्यक पोषण मिलता रहे। इस अभियान की विशेषता यह भी है कि कोई भी इच्छुक नागरिक, संस्था, उद्योगपति या सामाजिक संगठन ‘नि-क्षय मित्र’ बनकर किसी टीबी मरीज के उपचार और पोषण की जिम्मेदारी साझा कर सकता है।
कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए हैं कि अभियान को पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ संचालित किया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि जिले का कोई भी पात्र टीबी मरीज पोषण सहायता से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि टीबी पर विजय केवल दवा से नहीं, बल्कि पौष्टिक आहार, समय पर उपचार और समाज के सहयोग से ही संभव है। यदि पूरा समाज इस अभियान से जुड़ेगा, तो टीबी मुक्त कटनी का लक्ष्य जल्द ही वास्तविकता में बदलेगा। कटनी में शुरू हुई यह मुहिम उन मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण है, जो बीमारी के साथ-साथ आर्थिक कठिनाइयों से भी जूझ रहे हैं। अब उन्हें केवल दवा ही नहीं, बल्कि यह विश्वास भी मिलेगा कि पूरा समाज उनके स्वस्थ जीवन की कामना के साथ उनके साथ खड़ा है।
