ब्रेकिंग न्यूज : दमोह उपचुनाव पड़ा मध्यप्रदेश शासन को भारी , सत्ताधरी पार्टी को जनता ने सिखाया सबक
जानलेवा साबित हुआ दमाेह उपचुनाव
(भोपाल) बढ़ते हुए कोरोना संक्रमण के दौरान मध्यप्रदेश के विधानसभा का दमोह उपचुनाव कराना जनता के लिए प्राणघातक सिद्ध हो रहा है। चुनाव दौरान आम जनता एवं मीडिया के द्वारा बार बार चुनाव कराये जाने की आलोचना करते हुए इसे स्थगित करने की मांग की जाती रही है लेकिन चुनाव आयोग एवं शासन ने अनसुनी करते हुए चुनाव प्रचार में कोरोना प्रोटोकाल के नियमो की धज्जियां उड़ाते हुए ना तो मास्क का उपयोग किया गया और ना ही सोशल डिस्टन्सिंग का पालन । चुनाव प्रचार में ज्यादा से ज्यादा भीड़ इकठा करने में परहेज नहीं किया गया उसका परिणाम यह हुआ की भाजपा को सत्ता में कवीज़ रहते हुए भी पूरी टीम को पूरी ताक़त लगाने के बाद भी जनता ने स्वीकार नहीं किया और अंत में सत्तासीन होते हुए भी पराजय का सामना करना पड़ा आमजन केवल एक ही चीज कहते रहे की जनता भूखो मर जाये लेकिन कोरोना के कारण बाहर नहीं निकलना यह नियम चुनावी जगह पर लागु नहीं होता । प्रशासनिक अधिकारियों की मजबूरी थी की उनको अपने प्राण को जोखिम में डालकर अपनी ड्यूटी निभानी पड़ी ।
चुनाव संपन्न कराने के दौरान 800 शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी, जिसमे से 200 शिक्षक प्रशिक्षण लेने और मतदान कार्य के दौरान कोरोना संक्रमित हो गए जिसमे से अभी तक 14 शिक्षकों की मौत हो चुकी है। अभी भी लगभग एक सैकड़ा शिक्षक कोरोना जैसी घातक वीमारी से जूझ रहे है ।
गौर तलब है की चुनावी कार्य के दौरान कोरोना संक्रमित होने वाले शिक्षकों की परवाह शासन ने नहीं की । बीमार होने के दौरान शिक्षकों को जिला अस्पताल में उपचार की सुविधाएं ना मिलने के कारण कुछ शिक्षकों को जबलपुर और सागर जाकर इलाज करवाना पड़ रहा है। शिक्षक बृजलाल अहिरवार चुनावी ड्यूटी के दौरान में संक्रमित हुए थे और उनके संक्रमण से उनकी पत्नी भी संक्रमित हो गई, और 5 मई को दोनों को अपनी जान गवानी पड़ी ।
संक्रमित शिक्षकों को शासन से नहीं मिली उपचार की सुविधाएं
चुनाव ड्यूटी के दौरान 200 शिक्षक कोरोना से संक्रमित हुए और शासन द्वारा उनकी उपचार में वरती गई लापरवाही के दौरान 14 शिक्षकों की मौत हो गई और वर्तमान में अभी भी 100 शिक्षक कोरोना संक्रमित है जिनमे से 20 की हालत बहुत गंभीर है । शिक्षक दिनेश प्रधान, बृजलाल अहिरवार, रसीद खां, ज्ञानेश्वर सिंह ठाकुर, आनंदीलाल करपेती, डालचंद्र साहू और हरिचरण तिवारी, सीताराम ठाकुर सहित लगभग 14 शिक्षकों को अपनी जान गवाकर चुनाव की कीमत चुकानी पड़ी ।
कोरोना ने नेताओं की भी ली जान
कोरोना ने अपना असर चुनाव प्रचार में लगे भाजपा एवं कांग्रेस के पदाधिकारी और कार्यकर्ता में भी नहीं छोड़ा। महिला कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष मांडवी चौहान, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष दमोह देवनारायण श्रीवास्तव एवं मध्यप्रदेश शासन के पूर्व मंत्री बृजेंद्र सिंह राठौर, ने भी कोरोना सक्रमण के कारण अपनी जान गवाई|
उपचुनाव ने ली कई लोगों की जान
उपचुनाव के प्रारंभ से कोरोना का हवाला देते हुए कई बार चुनाव रोकने की मांग की लेकिन सरकार ने किसी की एक भी नहीं सुनी और लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा और सत्ताधारी पार्टी को भी कोरोना ने पराजय का सामना करा दिया।
