कटनी जिले में बिना मान्यता के चल रहे सैकड़ों स्कूल, शासन के नियमो की उड़ा रहे धज्जियां

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(कटनी) भारत सरकार ने नई शिक्षा नीति लागू की है और शिक्षा को बेहतर करने का दावे और वादे सरकार के द्वारा किए जा रहे हैं, लेकिन कटनी जिले की बात सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। आपको जानकर ताज्जबु होगा कि कोरोना के कहर खत्म होने के बाद भी जिले में 427 स्कूलों को मान्यता नहीं मिल सकी है। हैरानी की बात तो यह है कि पिछले दो साल साल से स्कूल बिना मान्यता के ही ऑनलाइन, ऑफलाइन पढ़ाई कराकर अंकुसूचियां थमा रहे हैं। इसका खुलासा उस समय हो रहा है जब अभिभावक एक स्कूल से टीसी लेकर दूसरे स्कूल में दाखिला करवाने के लिए जा रहे हैं। गुरुनाक वार्ड में संचालित स्कूल से अभिभावक ने टीसी लेकर जब संकुल केंद्र में काउंटर साइन कराने पहुंचे तो पता चला कि 2020 से स्कूल की मान्यता का नवीनीकरण ही नहीं हुआ। जानकारों की मानें तो जिले में निजी स्कूलों की मनमानी का यह खेल अफसरों की मेहरबानी से फलफूल रहा है। प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में अफसरों ने मानकों को ताक में रखकर स्कूल खोलने दिया है। शिकंजा न कसे जाने से मनमानी चरम पर है और संचालक अभिभावकों से खुली लूट मचाकर शिक्षा के नाम से बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।

स्कूल की मान्यता नहीं होने पर यह है प्रावधान

राइट टू एजुकेशन के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बिना मान्यता के स्कूल चला रहा है तो एक लाख रुपये का जुर्माना है, पकड़े जाने पर तत्काल स्कूल बंद नहीं करता तो 10 हजार रुपये की प्रतिदिन पैनाल्टी का प्रावधान है। चेतावनी देकर नियमों का पालन कराया जाता है, इसके बाद मान्यता समाप्ति की कार्रवाई बीआरसी कर सकते हैं, लेकिन कोई भी बीआरसी नहीं कर रहे हैं। अंतिम कार्रवाई जिला शिक्षा अधिकारी को करनी होती है। लेकिन हाल के वर्षों में जिले में एक भी कार्रवाई नहीं हुई।

इन इलाकों में संचालित हैं स्कूल

शहर क्षेत्र में भी जमकर बिना मान्यता के स्कूल चल रहे हैं। एनकेजे थाना क्षेत्र, गुरुनानक वार्ड, कुठला, माधवनगर, झिंझरी, दुबे कॉलोनी के अलावा ग्रामीण इलाकों में जमकर बिना मान्यता लिए व रिन्युअल कराए धड़ल्ले से स्कूल चल रहे हैं। बरही, बड़वारा, बहोरीबंद, रीठी, विजयराघवगढ़ सहित अन्य ब्लॉक मुख्यालय क्षेत्रों में स्कूल चल रहे हैं, जो बच्चों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

मान्यता जांच के दौरान खानापूर्ति

स्कूलों को मान्यता देने से पूर्व माशिमं और स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्थल निरीक्षण व दस्तावेजों की जांच के बाद मान्यता देनी होती है। इस मान्यता की प्रक्रिया में भी खानापूर्ति चल रही है। सबसे ज्यादा गड़बड़ी बीआरसी कर रहे हैं। भौतिक सत्यापन की जिम्मेदारी कटनी, रीठी, बहोरीबंद, ढीमरखेड़ा, बड़वारा, विजयराघवगढ़ के बीआरसी की है। कई स्कूलों में गार्डन, फायर फाइटिंग सिस्टम, छात्र-छात्राओं का शौचालय अलग-अलग नहीं है। भवन भी पर्याप्त नहीं हैं। इसके बाद भी भी सभी में आके रिपोर्ट दे दी जा रही है।

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