दस स्वसहायता समूह के हितग्राही केला की खेती से कुपोषण से जंग में बन रहे है सहायक “सफलता की कहानी” –
( श्योपुर )
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मप्र डे-ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से जिले के आदिवासी विकासखण्ड कराहल के क्षेत्र में गठित स्वसहायता समूहो के माध्यम से 52 एकड़ भूमि पर बड़ी तादात में केला के बगीचे लगाने की दिशा में विगत वर्ष कदम उठाये गये थे। केला की खेती कुपोषण की जंग में सहायक बनने की दिशा में मिशन के मैदानी स्तर पर तैनात कर्मचारियों द्वारा सहरिया चौपालों पर आदिवासी समुदाय की महिला हितग्राहियों को भरपूर सहयोग देने के प्रयास किये गये। जिसमें ग्राम भ्रमण के दौरान 10 स्वसयहाता समूहो के हितगाहियों को अवगत कराया कि कुपोषण से जंग की दिशा में श्योपुर जिले में निरंतर अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में स्वास्थ्य, महिला बाल विकास एवं मप्रडे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन भरपूर सहयोग देने के प्रयास किये। जिसके कारण सहरिया बाहुल्य कराहल क्षेत्र के गांवो में गठित 10 स्वसहायता समूहो के हितग्राहियों को यंहा केला की खेती लहलहाने लगी। इस वर्ष उन्होने कुपोषण के विरूद्ध जंग के लिए केला के पौधो का व्यवस्थित तरीके से पानी, खाद देने के बाद पेडो में केला की बम्पर पैदावार आ गई है। जिले के आदिवासी विकासखण्ड कराहल के ग्राम दुबडी में गठित बंजरगी स्वसहायता समूह कीं सदस्य हितग्राही श्रीमती शुकली पत्नी श्री मानसिंह, ग्राम बरगावा के गणेश स्वसहायता समूह की श्रीमती कमली पत्नी श्री रामचंनद्र, ग्राम आमेठ के जय दुर्गे स्वसहायता समूह की श्रीमती सुखिया पत्नी रामकुमार, ग्राम भोटूपुरा के लक्ष्मी स्वसहायता समूह की श्रीमती रामबती पत्नी श्री अशोक, ग्राम मोराई के राधाकृष्ण स्वसहायता समूह की श्रीमती छोटीबाई पत्नी श्री किशन ने बताया कि मप्र सरकार के माध्यम से जिला प्रशासन एवं मप्र डे-आजीविका मिशन के प्रयासो से केला की खेती की बम्पर पैदावार आ रही है। जिससे समूहो की माली हालत मे सुधार आयेगा। साथ ही क्षेत्र के ग्रामो के कमजोर बच्चो की पोष्टिक आहार केला खाने से ग्रेड सुधरेगी। हमारी केला की पैदावार कुपोषण से जंग में कामयाब अवश्य होगी। |
