कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने के लिए समिति का किया गठन

विकासखण्ड स्तर एसडीएम की अध्यक्षता में दलों का किया गया है गठन

(कटनी)  कलेक्टर प्रियंक मिश्रा द्वारा बाल विवाह रोकथाम को लेकर विकासखंड स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में दलों का गठन किया गया है। गठित दल विशेष रूप से अक्षय तृतीया पर होने वाले बाल विवाह रोकने निगरानी रहेंगे और आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

बाल विवाह रोकथाम हेतु प्रत्येक विकासखण्ड स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अध्यक्षता में गठित दल में अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस), मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत, विकासखंड चिकित्सा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी सदस्य और परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास, सदस्य सह सचिव के रूप में शामिल किए गए हैं।

कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने जि़लें के समस्त नागरिकों से बाल विवाह रोकथाम हेतु प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है। बाल विवाह की सूचना प्राप्त होने पर चाइल्ड लाइन टोल फ्री नंबर 1098, अपने क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी, निकटतम पुलिस थाने व महिला एवं बाल विकास कार्यालय में सम्पर्क कर सकते हैं। सूचना देने वाली की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी।

            बाल विवाह कानूनन एवं सामाजिक अपराध है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 एवं मध्यप्रदेश बाल विवाह प्रतिषेध नियम 2007 के अनुसार 21 वर्ष से कम आयु के बालक एवं 18 वर्ष से कम आयु की बालिका का विवाह, बाल विवाह कहलाता है, एवं कानूनी अपराध है। अधिनियम अन्तर्गत बाल विवाह करवाने वाले, जिसमें माता-पिता, संरक्षक, रिश्तेदार, बाल विवाह में सेवाएं देने वलो सेवा प्रदाता जैसे-पंडित, मौलवी, पादरी, कैटरर्स, हलवाई, प्रिटिंग प्रेस, घोड़े वाले एवं विवाह में सम्मिलित होने वालों को भी दोषी माना जाता है। इसमें एक लाख रूपए का जुर्माना और 02 वर्ष तक की सजा हो सकती है।

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