लॉकडाउन के बाद जिले में गतिविधियों के संबंध में लिये गये सुझाव
जिला आपदा प्रबंधन समूह की बैठक सम्पन्न
कटनी – कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट शशिभूषण सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित जिला आपदा प्रबंधन समूह की बैठक में लॉकडाउन अवधि समाप्त होने पर कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव करते हुये आगामी समय में जिले में अपनाई जाने वाली रणनीति और नवीन गतिविधियों को संचालित करने के संबंध में व्यापक रुप से विचार विमर्श किया गया और सुझाव लिये गये। इस मौके पर विधायक संदीप जायसवाल, प्रणय प्रभात पाण्डेय, विजयराघवेन्द्र सिंह, पुलिस अधीक्षक ललित शाक्यवार, अपर कलेक्टर साकेत मालवीय, पूर्व महापौर शशांक श्रीवास्तव, समिति के सदस्य रामरतन पायल, पीताम्बर टोपनानी, गुमान सिंह, मिथलेश जैन, पद्मेश गौतम, सीईओ जिला पंचायत जगदीश चन्द्र गोमे, आयुक्त नगर निगम आर0पी0 सिंह, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ0 एस0के0 निगम भी उपस्थित थे।
राज्य शासन के निर्देशानुसार सभी जिलों में 13 मई को जिला आपदा प्रबंधन समूह की बैठक आयोजित कर लॉकडाउन अवधि के समाप्त होने पर 17 मई के पश्चात जिले के परिदृश्य में आगामी समय में कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव करते हुये नवीन गतिविधियों के प्रारंभ करने के संबंध में विचार विमर्श कर सुझावों के अनुसार कार्ययोजना प्रस्ताव आज ही तैयार कर राज्य शासन को प्रस्तुत किया जाना है। इसी क्रम में जिला आपदा प्रबंधन समूह की बैठक में सदस्यों के सुझाव और विचार विमर्श कर प्रस्ताव तैयार किये गये।
कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि रेड जोन के जिले से लगा हुआ अपना कटनी जिला, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवी, जिले के नगारिकों द्वारा प्रशासन को दिये गये सहयोग से अभी भी ग्रीन जोन में बना हुआ है। खतरा अभी कम नहीं हुआ है, लॉकडाउन समाप्त होने के बाद जिले को सुरक्षित बनाये रखने की और भी चुनौतियां तथा जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। भारत सरकार के गृह मंत्रालय और राज्य शासन के निर्देशों के अनुक्रम में लॉकडाउन की अवधि में अत्यावश्यक सेवा और अनुमत्य गतिविधियों को छूट प्रदान की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में सभी गतिविधियां पूर्व की भांति जारी है। जिले में आये प्रवासी मजदूरों को रोजगार के साधन मुहैया कराने मनरेगा के तहत व्यापक निर्माण कार्य प्रारंभ किये गये हैं। श्रमिक ट्रेन, बसों, ट्रकों अथवा पैदल या अन्य साधनों से जिले में आने वाले लोगों की स्वास्थ्य जांच, भोजन, पानी के प्रबंध और उन्हें उनके घर तक पहुंचाने के सुरक्षित प्रयास लगातार जारी है। उद्योग और कारखानें, दुकानें एवं अन्य गतिविधियों को चलाने सोशल डिस्टेन्सिंग और सुरक्षा के उपायों की शर्त पर अनुमति दी गई है।
पुलिस अधीक्षक ललित शाक्यवार ने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिये आगामी समय में भी हर गतिविधियों में मास्क, सैनीटाईजर और सोशल डिस्टेन्सिंग के सिद्धांत को जीवन शैली का अंग बनाना होगा। उन्होने कहा कि लॉकडाउन अवधि में प्रतिबंधित गतिविधियों को संक्रमण से बचाव की सावधानियों और सोशल डिस्टेन्स की शर्तों पर अनुमति पर विचार किया जा सकता है। समिति के सदस्यों ने लॉकडाउन समाप्ति के बाद की परिस्थितियों में जिले में प्रतिबंधित गतिविध्ािियों में से आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को बचाव की सावधानियों की शर्त पर प्रारंभ करने, दुकानों के खुलने के समय में वृद्धि करने, अन्य प्रान्तों से आये मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया कराने अपने जिले की सीमा में प्रवेश करने वाले पैदल यात्रियों को वाहनों से अपनी जिले की सीमा से बाहर पहुंचाने और उनके भोजन-पानी का सुनिश्चित प्रबंध करने संबंधी सुझाव दिये।
44 हजार मजदूरों को मिल रहा है मनरेगा में काम
कलेक्टर शशिभूषण सिंह ने बताया कि जिले के सीमा में स्थापित चैकपोस्ट नाके पर जिले में प्रवेश करने वाले वाहनों, यात्रियों, पैदल यात्रियों की स्वास्थ्य जांच और उनके भोजन-पानी की व्यवस्था की गई है। श्रमिक स्पेशल ट्रेन या अन्य राज्यों से आने वाले बस यात्रियों, ट्रकों में आने वाले मजदूरों को स्वास्थ्य जांच एवं भोजन पानी का प्रबंध कर उन्हें बसों के माध्यम से उनके गृह ग्राम तक पहुंचाया जा रहा है। बाहर से अन्य राज्यों से लौटे मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके, इसके लिये मनरेगा के तहत लगभग 2 हजार से अधिक निर्माण कार्य संचालित किये जा रहे हैं। मनरेगा के पीक टाईम में मानव दिवस श्रम अर्जित करने का अधिकतम संख्या 31 हजार मजदूरों की इस जिले में रही है। वर्तमान में मनरेगा के कार्यों में 44 हजार मजदूरों को प्रतिदिन रोजगार दिया जा रहा है। बाहर से आये 7 हजार मजदूरों के जॉबकार्ड रिन्यूवल किये गये हैं तथा जिन श्रमिकों के जॉबकार्ड नहीं हैं, उनके नये जॉबकार्ड बनाये जा रहे हैं।

