भैया दूज प्रेम का, हृदय का त्योहार ! इसमें बसती द्रौपदी, है कान्हा का प्यार !!

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कहती हमसे दूज ये,
तुच्छ है सभी स्वार्थ !
बहनों की शुभकामना,
तुमको करे सिद्धार्थ !!
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भाई-बहना नेह के,
रिश्तों के आधार !
इस रिश्ते के सामने,
हीरे हैं बेकार !!
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बहना मूरत प्यार की,
मांगे ये वरदान !
भाई को यश-बल मिले,
लोग करे गुणगान !!
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भाई से छोटे सभी,
सोना, मोती, सीप !
दुनिया मुंह जब मोड़ती,
होता यही समीप !
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–प्रियंका सौरभ

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