सतना कांग्रेस दो खेमों में बंटी: सिद्धार्थ कुशवाहा बनाम संतोष पांडे की सियासत ने बढ़ाई पार्टी की मुश्किलें

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(सतना/एमपी) मध्यप्रदेश की राजनीति में कांग्रेस एक बार फिर अपने भीतर के मतभेदों से जूझती दिख रही है। सतना जिला कांग्रेस अब दो खेमों में बंट चुकी है — एक ओर हैं ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाहा, तो दूसरी ओर किसान कांग्रेस के जिला अध्यक्ष संतोष पांडे। दोनों ही कांग्रेस के चेहरे हैं, पर अब ये दो विचारधाराओं और दो शक्ति-केंद्रों का प्रतीक बन गए हैं।

पार्टी के भीतर दो धड़े — एक कांग्रेस, दो रास्ते
जानकारों का कहना है कि यह टकराव अचानक नहीं हुआ। पिछले कुछ वर्षों से दोनों नेताओं के बीच कटाक्ष, दूरी और कार्यक्रमों में अलगाव बढ़ता गया।
संतोष पांडे को जहां राहुल गांधी खेमे का समर्थक माना जाता है, वहीं सिद्धार्थ कुशवाहा अपने स्वतंत्र राजनीतिक वर्चस्व की राह पर हैं। नतीजा — सतना कांग्रेस अब भीतर ही भीतर दो भागों में बँट चुकी है।

पुराने दिग्गजों का पलायन और टूटता संगठन
राजा राम त्रिपाठी, मनीष तिवारी जैसे पुराने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के पार्टी छोड़ने से सतना की संगठनात्मक जड़ें पहले ही कमजोर हो चुकी थीं। अब जब स्थानीय स्तर पर भी गुटबाज़ी खुलकर सामने आने लगी है, तो सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस केवल मंच पर ही एकजुट है, या जमीनी स्तर पर अब यह ‘नाम की पार्टी’ बनती जा रही है?”

जनाधार पर जंग — किसान बनाम कार्यकर्ता नेटवर्क
संतोष पांडे का फोकस किसान और ग्रामीण इलाकों में पकड़ मजबूत करने पर है। वहीं सिद्धार्थ कुशवाहा को संगठन के अंदरूनी ढांचे और युवा वर्ग में समर्थन हासिल है। दोनों नेताओं के बीच यह ‘जनाधार की जंग’ सीधे तौर पर आगामी विधानसभा और निकाय चुनावों को प्रभावित कर सकती है।

राजनीतिक विश्लेषण
स्थानीय विश्लेषकों का कहना है कि सतना में कांग्रेस की यह टूट भाजपा के लिए अप्रत्यक्ष लाभ बन सकती है। कांग्रेस के नेता मंच पर चाहे जितनी एकता दिखाएं, पर भीतर से संगठन अब ‘दो कप्तानों वाली नाव’ की तरह डगमगाता दिख रहा है।
कांग्रेस हाईकमान ने भले नई जिलाध्यक्ष नियुक्तियों से संगठन में ऊर्जा भरने की कोशिश की हो, पर सतना में हालात उलट नतीजे दिखा रहे हैं।

अंतिम सवाल
आख़िर कांग्रेस की बागडोर सतना में किसके हाथ में जाएगी —
सिद्धार्थ कुशवाहा का अनुभव या संतोष पांडे का किसान जनाधार?
यह सवाल आने वाले चुनावों में कांग्रेस के भविष्य की दिशा तय करेगा।

-उमेश गौतम
(संपादक, समग्र प्रदेश)

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