व्यावसायिक शिक्षा के साथ कौशल विकास और कृषि शिक्षा भी बने प्राथमिकता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
स्कूल शिक्षा विभाग की गतिविधियों की हुई समीक्षा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को विधानसभा समिति कक्ष में स्कूल शिक्षा विभाग की गतिविधियों की जानकारी ली और कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि अच्छे परीक्षा परिणाम लाने वाले विद्यालयों के प्राचार्यों को भी प्रोत्साहित किया जाए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्कूल शिक्षा विभाग की गतिविधियों की जानकारी ली और कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने “भवन एक कक्षाएं अनेक” की तर्ज पर एक विद्यालय भवन में शेष खाली समय में महाविद्यालय की कक्षाएं संचालित करने की व्यवस्था प्रारंभ करने पर विचार कर कार्रवाई करने को कहा।
बैठक में मुख्य रूप से पाठ्य पुस्तकों के नि:शुल्क प्रदाय, स्कूटी वितरण और साइकिल वितरण योजना के क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि बालिका शिक्षा एवं छात्रावास का लाभ विद्यार्थियों को दिया जा रहा है। सेनिटेशन और हाइजिन किट का वितरण 19 लाख बालिकाओं को प्रति बालिका 300 रुपए के मान से डीबीटी द्वारा किया गया है। छात्रावासों में वाशिंग मशीन, रोटी मेकर, मैट्रेस जैसी सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाभियान योजना में 210 छात्रावास स्वीकृत हुए हैं। शालाओं के सुदृढ़ीकरण का कार्य भी सुनिश्चित किया गया है। सांदीपनि और पीएम श्री विद्यालयों का लाभ विद्यार्थियों को मिल रहा है। परीक्षा परीणामों में सुधार के प्रयासों को सफलता मिल रही है। वर्ष 2024-25 के प्रथम परीक्षा परिणामों में कक्षा दसवीं 74 प्रतिशत और कक्षा 12वीं 76 प्रतिशत से अधिक परिणाम मिले हैं। प्रथम और द्वितीय परीक्षा में क्रमश: औसत 87 और 82 प्रतिशत परिणाम रहा है। इसी तरह शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज हुई है।
विभागीय समीक्षा में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश-
- किताबों का वितरण प्रत्येक स्तर तक सुनिश्चित करें।
- साइकिल मैन्यूफ़ैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिये योजना बनाई जाये।
- नवोदय विद्यालय की तर्ज़ पर सांदीपनि आश्रम विद्यालय बनायें जायें।
- व्यवसायिक शिक्षा पर ज़ोर दिया जाये।
- विद्यालयों में कृषि की शिक्षा भी दी जाये।
- रूचि अनुसार कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाये।
- अच्छा परीक्षा परिणाम देने वाले शिक्षकों को राज्य स्तर पर पुरस्कृत किया जाये।
- विद्यालय पहुँच मार्ग में यदि दिक़्क़त है तो उसे अन्य विभागों से समन्वय कर सुव्यवस्थित किया जाये।
- आवश्यकता वाले दूरस्थ क्षेत्रों में निजी निवेश पर निजी विद्यालयों को प्रोत्साहित करने की नीति बनाई जाये।
- शिक्षा विभाग के पोर्टल और ऐप पर काम किये जायें, शिक्षकों की परेशानी कम करें।
