अल्ट्राटेक सीमेंट की तिलौरा खदान में भारी लापरवाही, इंसानों व मवेशियों की जान पर खतरा
नियमों को ताक पर रखकर हो रही खुदाई, राजस्व चोरी की आशंका
(मैहर) तिलौरा ग्राम पंचायत अंतर्गत संचालित अल्ट्राटेक सीमेंट की माइंस इन दिनों गंभीर लापरवाही और मनमानी का उदाहरण बनी हुई है। शासन के स्पष्ट नियमों के अनुसार किसी भी खदान के चारों ओर बाउंड्री वॉल या तारबंदी अनिवार्य होती है, ताकि आवारा पशु, ग्रामीण, महिलाएं और बच्चे खदान क्षेत्र में प्रवेश न कर सकें। लेकिन तिलौरा की इस खदान में नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
खदान के दोनों ओर बसी आबादी, लगातार हो रही ब्लास्टिंग और पूरी तरह खुली खदान यह साबित करने के लिए काफी है कि कंपनी को न तो सुरक्षा की चिंता है और न ही आसपास रहने वाले ग्रामीणों की। स्थिति यह है कि खदान के अंदर और आसपास छोटे-छोटे बच्चे, बुजुर्ग, बकरी और गाय चरते हुए देखे जा सकते हैं। ऐसे में किसी भी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमों को ताक पर रखकर खनन कार्य जारी है। न तो खनिज विभाग के अधिकारी नियमित निरीक्षण करने आते हैं और न ही कंपनी प्रबंधन ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर गंभीर दिखाई देता है। ब्लास्टिंग के दौरान उड़ते पत्थर और कंपन से घरों को नुकसान की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।

राजस्व चोरी की भी आशंका
सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी ने आगे और मनमानी करने की तैयारी कर ली है। बताया जा रहा है कि कंपनी ने सैकड़ों की संख्या में अपनी खुद की लोडिंग गाड़ियां खरीदी हैं, जिन्हें सड़कों पर उतारा जाएगा। इससे एक ओर स्थानीय ट्रांसपोर्टरों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा, वहीं दूसरी ओर पत्थर परिवहन में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, जहां पहले ट्रांसपोर्टरों की गाड़ियों की गिनती और टीपी (ट्रांजिट पास) के आधार पर हिसाब होता था, वहीं अब कंपनी की अपनी गाड़ियों से लोडिंग होने पर न तो सही गिनती होगी और न ही पूरी टीपी दर्शाई जाएगी। अनुमान है कि 100 गाड़ियों में से केवल 50 गाड़ियों का ही रिकॉर्ड दिखाकर शेष पत्थर बिना हिसाब के कंपनी में पहुंचाया जा सकता है, जिससे खुलेआम राजस्व चोरी तय मानी जा रही है।
ग्रामीणों में आक्रोश, आंदोलन की तैयारी
मिली जानकारी के अनुसार, तिलौरा के निवासी जल्द ही अपने क्षेत्र में संचालित अल्ट्राटेक सीमेंट की माइंस के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो किसी बड़े हादसे की पूरी जिम्मेदारी कंपनी और संबंधित विभागों की होगी।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक संज्ञान लेता है या फिर किसी अनहोनी के बाद ही कार्रवाई होती है।

