खाद्यान्न उपार्जन, भंडारण और लॉजिस्टिक्स में 150 करोड़ का घोटाला — जितेंद्र (जीतू) पटवारी
किसानों के हक पर डाका, गरीबों की थाली में ‘जहर’ परोस रही सरकार: जितेंद्र (जीतू) पटवारी
(भोपाल) मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जितेंद्र (जीतू) पटवारी ने प्रदेश में खाद्यान्न उपार्जन, भंडारण एवं लॉजिस्टिक्स व्यवस्था में व्याप्त व्यापक भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलता और राजनीतिक संरक्षण पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह केवल कुप्रबंधन नहीं, बल्कि संगठित लूट का एक बड़ा तंत्र है, जिसने किसानों के अधिकारों और गरीबों की खाद्य सुरक्षा दोनों को खतरे में डाल दिया है।
उन्होंने कहा कि रायसेन जिले के वेयरहाउसों में 35 करोड़ रुपये की लागत से खरीदा गया लगभग 20,000 मीट्रिक टन गेहूं, रखरखाव और कीटनाशक के नाम पर 150 करोड़ रुपये का बोझ बनाकर सड़ने के लिए छोड़ दिया गया। 34 बार कीटनाशक छिड़काव के बावजूद अनाज का ‘जहर’ बन जाना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि यह पूरा मामला फर्जी बिलिंग, घटिया सामग्री और अधिकारियों-ठेकेदारों की मिलीभगत का परिणाम है।
उन्होंने ने कहा कि यह एक अकेला मामला नहीं है। पिछले चार वर्षों में प्रदेश में 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं सड़ चुका है, जिसमें से लाखों टन अनाज पूरी तरह नष्ट हो गया। इस सड़े हुए अनाज की नीलामी से भी सरकार को लगभग 200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जो सीधे तौर पर जनता के पैसे की बर्बादी है।
उन्होंने जबलपुर और सिवनी में उजागर हुए “घोस्ट ट्रांसपोर्ट” घोटाले का उल्लेख करते हुए कहा कि बिना वास्तविक परिवहन के करोड़ों रुपये निकाल लिए गए। 92% ट्रिप फर्जी पाए गए, और कार, स्कूटर तथा दोपहिया वाहनों के नंबरों से सैकड़ों क्विंटल धान ढोने का दावा किया गया। यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार अब तकनीकी और संगठित रूप ले चुका है।
श्री पटवारी ने आरोप लगाया कि वेयरहाउस आवंटन में भी सत्ता से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि आम वेयरहाउस मालिकों के भुगतान लंबित हैं। क्षमता से अधिक भंडारण दिखाकर किराया घोटाला किया जा रहा है, और वास्तविक अनाज खुले में सड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब प्रदेश में 26% से अधिक बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं, और दूसरी ओर लाखों क्विंटल अनाज गोदामों में सड़कर बर्बाद हो रहा है। गरीबों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से घटिया और मिलावटी अनाज परोसा जा रहा है, जो उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
श्री पटवारी ने कहा कि यह पूरा तंत्र—नागरिक आपूर्ति निगम, वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन और सहकारिता विभाग—आपसी मिलीभगत और जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति के कारण विफल हो चुका है। इसका सीधा खामियाजा किसान, गरीब और आम नागरिक भुगत रहे हैं।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें:
रायसेन के 150 करोड़ के घोटाले की स्वतंत्र फोरेंसिक जांच कराई जाए।
वेयरहाउस आवंटन और भुगतान की पूरी सूची सार्वजनिक की जाए।
दोषी अधिकारियों और संबंधित राजनैतिक संरक्षण देने वालों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो।
सड़े हुए अनाज के नुकसान की भरपाई किसानों के हित में की जाए।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी तंत्र लागू किया जाए।
अंत में उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का अन्नदाता अब इस “अनाज के खेल” को समझ चुका है। यह सरकार किसानों के पसीने और गरीबों के हक पर डाका डाल रही है, और कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को सड़क से सदन तक उठाकर दोषियों को बेनकाब करेगी।
