संकल्प’ हमारे जीवन की ‘दिशा और दशा’ को तय करती है

कर्म की साधना करने वाले मानते हैं कि किसी भी अभिष्ट की पूर्ति के लिए दृढ़ता के मार्ग का चयन ही संकल्प है। वस्तुत: संकल्प दो प्रकार का होता है। एक यह कि मुझे यह काम करना है, इस संकल्प को हम भाव विषयक संकल्प कह सकते हैं। दूसरा इसके विपरीत कि मुझे यह काम नहीं करना।इसे अभाव विषयक संकल्प कह सकते हैं।

सीधे तौर पर कहें तो संकल्प मनुष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप से जुड़े होते हैं। यदि किसी तपस्वी व्यक्ति की बात छोड़ दें तो एक सामान्य व्यक्ति की आवश्यकताओं का कोई ओर-छोर नहीं है।इन आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु अनेक साधन हो सकते हैं, इनमें सत्य साधन भी सम्मिलित है और असत्य साधन भी हो सकते हैं। साधन के प्रयोग से पूर्व संकल्प का होना आवश्यक है। संकल्प के अभाव में कार्य सिद्धी मे अनिश्चिता संदिग्ध रहती है।

‘संकल्प’ हमारे जीवन की ‘दिशा और दशा’ को तय करती है, क्योंकि संकल्प’ हमारी ‘स्व-स्थिति’ का आधार होता है। संकल्प से ही हम अपनी स्मृतियाँ जागृत करते हैं,इसलिए संकल्प की शक्ति विज्ञान की शक्ति से अधिक ‘शक्तिशाली’ होता है।
✍️ पंडित सुरेन्द्र दुबे
पत्रकार, विजयराघवगढ़

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