इमलई देवगढ़: प्राचीन पत्थरों में दिखती है इतिहास की झलक

(जबलपुर) जबलपुर के कुंडेश्वर धाम के पास स्थित ‘इमलई देवगढ़’ अपनी प्राचीन धरोहरों के लिए जाना जाता है। यह जगह न केवल पुराने मंदिरों और कलात्मक बावलियों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां की मूर्तियां और शिलालेख भी बहुत कीमती हैं। अब इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने और इसे पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए विशेष प्रयास शुरू कर दिए हैं। बताया जाता है कि यहां स्थित 16वीं और 17वीं शताब्दी के हिंदू मंदिरों के अवशेष उस समय की अद्भुत वास्तुकला को दर्शाते हैं। यहाँ की प्राचीन बावलियाँ इस बात का सबूत हैं कि उस समय के लोग जल संरक्षण को लेकर कितने जागरूक थे। यहाँ की नक्काशीदार मूर्तियां इतिहास प्रेमियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, जो यह बताती हैं कि इमलई देवगढ़ कभी कला और संस्कृति का बड़ा केंद्र रहा होगा। हर साल मकर संक्रांति पर लगता है मेला इमलई देवगढ़ सिर्फ इतिहास ही नहीं, बल्कि आस्था का भी केंद्र है। ग्राम देवगढ़ के सरपंच श्री हेमराज झारिया के अनुसार, यहां की परंपराएं आज भी पूरी श्रद्धा के साथ मनाई जाती हैं। हर साल मकर संक्रांति पर यहां बड़ा मेला लगता है, जिसमें आसपास के गांवों से 2,000 से ज्यादा श्रद्धालु आते हैं। इस दौरान मंदिर में अखंड रामायण और भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। कलेक्टर श्री सिंह ने किया था निरीक्षण इस जगह की ऐतिहासिक अहमियत को समझते हुए हाल ही में जबलपुर के कलेक्टर श्री राघवेंद्र सिंह ने यहाँ का दौरा किया। उनके साथ सिहोरा के विधायक श्री संतोष वरकड़े, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक गहलोत और एसडीएम सुश्री प्रगति गनवीर भी मौजूद थे। कलेक्टर श्री सिंह ने यहाँ के प्राचीन मंदिरों, बावलियों और मूर्तियों का बारीकी से निरीक्षण किया। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यहाँ तक आने वाले रास्ते को बेहतर बनाया जाए ताकि पर्यटकों को कोई परेशानी न हो।

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