मानदेय और प्रोत्साहन राशि में कटौती से भड़कीं आशा कार्यकर्ता, बरही तहसील पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

सरकार ने छीना मेहनत का हक, लंबित भुगतान और बंद की गई प्रोत्साहन राशि बहाल नहीं हुई तो होगा आंदोलन

बरही। स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं में इन दिनों भारी असंतोष व्याप्त है। मानदेय वृद्धि की घोषणा पर अमल न होने, विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं में मिलने वाली प्रोत्साहन राशि बंद किए जाने तथा लंबे समय से लंबित भुगतानों को लेकर बुधवार को बरही तहसील क्षेत्र की आशा एवं ऊषा कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से मोर्चा खोल दिया। सैकड़ों की संख्या में एकत्रित आशा कार्यकर्ता बरही तहसील कार्यालय पहुंचीं और राज्य सरकार के नाम नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग की।

ज्ञापन में आशा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेशभर में स्वास्थ्य योजनाओं के सफल संचालन, गर्भवती महिलाओं की निगरानी, टीकाकरण, कुपोषित बच्चों की पहचान, जनजागरूकता अभियान तथा ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें आर्थिक रूप से लगातार उपेक्षित किया जा रहा है। उनका कहना है कि वर्तमान में उन्हें मात्र 6000 रुपये प्रतिमाह फिक्स मानदेय दिया जाता है, जबकि अतिरिक्त आय का प्रमुख स्रोत विभिन्न योजनाओं के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि होती है।

आशा कार्यकर्ताओं ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भोपाल द्वारा जारी नए निर्देशों के बाद अप्रैल 2026 से कई महत्वपूर्ण कार्यों पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि बंद कर दी गई है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं के प्रारंभिक पंजीयन पर मिलने वाली 200 रुपये की राशि, राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के दौरान स्कूल छोड़ चुके बच्चों को मोबिलाइज करने पर मिलने वाले 100 रुपये तथा गंभीर कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराने एवं फॉलोअप के लिए मिलने वाली 900 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि समाप्त कर दी गई है। इससे हजारों आशा कार्यकर्ताओं की आय पर सीधा असर पड़ा है।

आशा कार्यकर्ता अर्पणा तिवारी एवं अंजू सोनकर ने कहा कि अधिकांश आशा कार्यकर्ताओं का परिवार इन्हीं प्रोत्साहन राशियों पर निर्भर रहता है। सरकार द्वारा बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के इन मदों को बंद करना उनके साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के जमीनी स्तर के अधिकांश कार्य आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से ही पूरे किए जाते हैं, लेकिन उनके श्रम का उचित मूल्यांकन नहीं किया जा रहा।

ज्ञापन में वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा की गई उस घोषणा का भी उल्लेख किया गया, जिसमें आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में प्रतिवर्ष एक हजार रुपये वृद्धि करने की बात कही गई थी। आशा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि घोषणा के लगभग तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद उन्हें इसका लाभ नहीं मिला, जबकि अन्य वर्गों को बढ़ी हुई राशि नियमित रूप से प्राप्त हो रही है।

आंदोलनरत आशा कार्यकर्ताओं ने भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की भी मांग की। उनका कहना है कि शासन द्वारा उनके नाम पर जारी किए जाने वाले विभिन्न मदों के बजट की जानकारी सार्वजनिक की जाए, भुगतान पत्रकों की प्रति उपलब्ध कराई जाए तथा प्रत्येक माह एक निश्चित तिथि पर एकमुश्त भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही भुगतान होने पर मोबाइल संदेश के माध्यम से सूचना भेजने की व्यवस्था भी लागू की जाए।

इसके अलावा ज्ञापन में सेवा समाप्ति नोटिस की प्रक्रिया पर रोक लगाने, डिजिटल कार्यों के लिए मोबाइल अथवा मोबाइल खरीदने हेतु आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने, अन्य विभागों में लगाई जाने वाली ड्यूटी के लिए पृथक पारिश्रमिक देने, मातृत्व अवकाश अवधि में मानदेय जारी रखने तथा पूर्व से संचालित सभी प्रोत्साहन राशियों को यथावत बहाल रखने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।

आशा कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार गर्भवती महिलाओं की चारों एएनसी जांचें पूर्ण कराने के बावजूद उन्हें निर्धारित प्रोत्साहन राशि नहीं मिलती, विशेषकर तब जब प्रसव निजी अस्पतालों अथवा दूसरे जिलों में होता है। इससे कार्यकर्ताओं में निराशा और असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

ज्ञापन सौंपते हुए आशा एवं ऊषा कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया और लंबित भुगतान के साथ बंद की गई प्रोत्साहन राशि बहाल नहीं की गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगी। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी परिस्थिति की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में आशा एवं ऊषा कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही, जिन्होंने एक स्वर में अपने अधिकारों और सम्मानजनक पारिश्रमिक की मांग उठाते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपेक्षा जताई।

✍️ नीरज तिवारी
RPKP INDIA NEWS
            बरही

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