मैहर में वर्षों से जमे अधिकारियों पर सरकार क्यों मेहरबान…?
स्थानांतरण नीति की समय सीमा पूरी फिर भी कार्रवाई शून्य — शिवम पाण्डेय
मैहर। मध्यप्रदेश की मोहन सरकार द्वारा घोषित स्थानांतरण नीति की समय सीमा लगभग समाप्त हो चुकी है लेकिन मैहर सहित प्रदेश के अनेक विभागो मे वर्षों से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियो और कर्मचारियो पर अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। इस मुद्दे को लेकर युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव शिवम पाण्डेय ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि यदि सरकार अपनी ही घोषित नीतियों को लागू नहीं कर सकती तो ऐसी घोषणाओं का औचित्य क्या रह जाता है?
शिवम पाण्डेय ने कहा कि सरकार ने बड़े बड़े दावे करते हुए स्थानांतरण नीति लागू करने की घोषणा की थी लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी कई विभागो मे वर्षो से जमे अधिकारी यथावत बने हुए हैं। इससे यह सदेह पैदा होना स्वाभाविक है कि क्या स्थानांतरण नीति केवल चुनिंदा लोगों पर लागू होती है या फिर प्रभावशाली अधिकारियों को संरक्षण देने के लिए नियमों को दरकिनार किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों के कारण प्रशासनिक व्यवस्था में पारदार्शिता प्रभावित होती है और आम जनता की समस्याओं के समाधान में निष्पक्षता पर भी प्रश्न खड़े होते हैं। शासन की मंशा यदि वास्तव में सुशासन स्थापित करने की है तो सबसे पहले उसे अपनी घोषित नीति का निष्पक्ष पालन सुनिश्चित करना चाहिए।
युवा कांग्रेस नेता ने कहा कि स्थानांतरण नीति का उद्देश्य प्रशासनिक संतुलन, जवाबदेही और कार्यक्षमता को बढ़ाना होता है, लेकिन मैहर सहित कई स्थानों पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। वर्षों से जमे अधिकारियों के कारण स्थानीय स्तर पर एकाधिकार जैसी परिस्थितिया निर्मित हो जाती हैं, जिससे आम नागरिकों का विश्वास कमजोर होता है।
शिवम पांडे ने मुख्यमंत्री और संबंधित विभागो से मांग की है कि मैहर सहित पूरे प्रदेश में ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची सार्वजनिक की जाए जो निर्धारित अवधि से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं तथा स्थानांतरण नीति के तहत तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अपनी घोषणा पर अमल नहीं करती है तो यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि स्थानांतरण नीति केवल प्रचार का माध्यम थी प्रशासनिक सुधार का नहीं।
उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि जनता सब कुछ देख रही है। भाजपा सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि स्थानांतरण नीति का लाभ आम कर्मचारियों को मिलेगा या फिर वर्षों से जमे प्रभावशाली अधिकारियों को बचाने के लिए नियमों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। अब प्रदेश की जनता सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रही है।
