संसद के वर्षाकालीन सत्र में टीईटी का हल निकलेगा- सांसद वीडी शर्मा
शासकीय शिक्षक संगठन ने ज्ञापन सौंप कर बताई परेशानी, निराकरण की रखी मांग
(कटनी) अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश के सदस्य शासकीय शिक्षक संगठन की तहसील शाखा विजयराघवगढ़ के पदाधिकारियों ने विजयराघवगढ़ क्षेत्र के विधायक संजय सत्येंद्र पाठक (पूर्व मंत्री म.प्र.शासन) की उपस्थिति में संगठन के तहसील अध्यक्ष पंडित संदीप मिश्रा के नेतृत्व में वी डी शर्मा सांसद, लोकसभा क्षेत्र खजुराहो म.प्र. से विजयराघवगढ़ में मुलाकात की। आरटीई लागू होने के पूर्व सेवा में नियुक्त हुए शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा टीईटी से मुक्त रखने के सम्बंध में सांसद श्री शर्मा से अनुरोध किया।
संगठन के कटनी जिला उपाध्यक्ष हरीश दुबे ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू आरटीई के नियम का हवाला देकर सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि वर्ष 2011 के पूर्व सेवा में नियुक्त हुए समस्त ऐसे शिक्षक जिनकी सेवानिवृति को 01 सितंबर 2025 की स्थिति में 05 वर्ष से अधिक है उन सभी को पात्रता परीक्षा देनी होगी। 30 वर्ष से भी अधिक समय से निरंतर सेवा दे रहे मध्यप्रदेश सहित पूरे भारत देश के लाखों शिक्षकों के लिए यह फरमान “प्राकृतिक न्याय की अवधारणा” के विपरीत है, क्योंकि कोई भी निर्णय इस तरह से भूतलक्षी प्रभाव से लागू नहीं होते हैं।
शासकीय शिक्षक संगठन ने निवेदन किया कि चूंकि सर्वोच्च न्यायालय ने उक्त फैसला केंद्र सरकार द्वारा लागू आरटीई के नियम का हवाला देकर सुनाया है, अतः संसद के आगामी वर्षाकालीन सत्र में उक्त का संशोधन पारित कराकर 30 वर्ष से भी अधिक समय से निरंतर सेवा दे रहे पूरे भारत देश के लाखों शिक्षकों के लिए जो कि आरटीई लागू होने के पूर्व सेवा में नियुक्त हुए हैं, उन शिक्षकों को पात्रता परीक्षा टीईटी से मुक्त रखा जाए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान शिक्षक हरीश दुबे, संदीप मिश्रा, राजधर बड़गैयां, अजय मिश्रा, रघुनाथ क्षत्री, लीलाधर बड़गैयां, शरद कुमार चौधरी, कृष्ण कुमार नामदेव, अरविंद मिश्रा, महेंद्र वाजपई, विनोद जयसवाल सहित संगठन के सैकड़ों साथियों की उपस्थिति थी। अरुण सिंह परिहार
जिला महामंत्री शासकीय शिक्षक संगठन जिला कटनी ने बताया कि सांसद श्री शर्मा ने आश्वस्त किया कि संसद के वर्षाकालीन सत्र में टीईटी का हल निकलेगा और वर्षों से अपनी उत्कृष्ट सेवाएं दे रहे शिक्षकों का कोई भी नुकसान नही होने दिया जाएगा।
