बेटियों की पढ़ाई के लिए किया संघर्ष, स्‍व सहायता समूह से जुड़कर आज गांव की पहचान बनीं माया परस्ते

(जबलपुर) सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बीच भी यदि हौसला मजबूत हो तो सफलता की राह खुद बन जाती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है जबलपुर जिले के ग्राम नर्रई की निवासी माया परस्ते की, जिन्होंने स्व-सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि गांव में एक नई पहचान भी बनाई। रानी दुर्गावती समाधि स्थल के समीप स्थित ग्राम नर्रई की रहने वाली माया परस्ते आठवीं तक पढी़ हैं। उनके परिवार में पति और दो बेटियां हैं। परिवार का मुख्य आधार 2 एकड़ खेती था, जिसमें गेहूं, चना और मूंग जैसी फसलें उगाई जाती थीं। हालांकि खेती से होने वाली आय परिवार के खर्च और बेटियों की शिक्षा के लिए पर्याप्त नहीं थी। ऐसे में माया परस्ते गांव में रहकर ही आय बढ़ाने के अवसर तलाश रही थीं। वर्ष 2019 में ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गांव में स्व-सहायता समूहों का गठन शुरू हुआ। माया परस्ते ने समूह से जुड़कर महिला सशक्तिकरण और समूह निर्माण की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभानी शुरू की। उन्होंने अन्य महिलाओं को भी समूहों से जोड़ने का कार्य किया, जिससे उन्हें मानदेय प्राप्त होने लगा और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़े। कृषि कार्य का विस्तार करने के लिए माया ने समूह से दो बार 50-50 हजार रुपये का ऋण लिया और समय पर ब्याज सहित राशि चुकाई। आजीविका मिशन के सहयोग से उन्होंने जवाहर मॉडल के तहत अरहर की खेती की, जिससे बेहतर उत्पादन और आय प्राप्त हुई। इसके साथ ही ऋण लेकर सीडिंग मशीन खरीदी, जिसे किराये पर देकर अतिरिक्त आमदनी भी अर्जित कर रही हैं। माया परस्ते आजीविका मिशन की विभिन्न गतिविधियों जैसे बीपीआरपी, लोकसेवा और लखपति दीदी अभियान में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वर्तमान में वे त्रिवेणी संकुल स्तरीय संगठन में प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। वहीं, गांव में संचालित दीदी कैफे से जुड़कर भी अतिरिक्त आय प्राप्त कर रही हैं। आज माया परस्ते की मासिक आय करीब 12 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। गांव और आसपास के क्षेत्रों में उनकी पहचान एक सफल, आत्मनिर्भर और प्रेरणादायक महिला के रूप में बनी है। माया मानती हैं कि ग्रामीण आजीविका मिशन ने उन्हें आर्थिक मजबूती के साथ समाज में सम्मान और नई पहचान भी दिलाई, आज लखपति दीदी का सम्‍मान शासन से पा रही है। आजीविका मिशन की जिला विकास अधिकारी अंजुला मिश्रा का कहना है कि स्व-सहायता समूह महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उन्हें सामाजिक पहचान भी दिला रहे हैं। संतकली और माया जैसी महिलाएं आज सरकार की ओर से सम्मानित लख पति दीदी के रूप में पहचानी जा रही है एवं अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं, जो आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश कर रही हैं।

Share this:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

यह भी देखें