इंसानियत की अनूठी मिसाल: जब अपनों ने फेर लिया मुंह, तब ‘देवदूत’ बनकर तवे जैसी धूप में खून देने पहुंचे रितेश

आयुष्मान कार्ड के बाद भी ट्रांसप्लांट के लिए 5 लाख रुपयों की दरकार, जिंदगी बचाने की गुहार

(पन्ना) रिश्ते-नाते और समाज तब बेगाने हो गए, जब सिंहपुर निवासी 24 वर्षीय बेटी पूजा अहिरवार को जिंदगी और मौत के बीच जूझते हुए खून की सख्त जरूरत थी। किडनी खराब होने के कारण जिंदगी की जंग लड़ रही पूजा के पिता और भाई श्याम दो दिनों से हर चौखट पर जाकर खून की भीख मांग रहे थे। लेकिन, अफसोस कि किसी भी रिश्तेदार या समाज के व्यक्ति का दिल नहीं पसीजा। संकट के इस घने अंधेरे में मानवता की एक ऐसी किरण चमकी, जिसने साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है।

सोशल मीडिया पर गुहार सुनते ही पिघला स्कूल संचालक का दिल

जब हर तरफ से निराशा हाथ लगी, तब लाचार भाई श्याम ने पन्ना जिले के जाने-माने समाजसेवी राम बिहारी गोस्वामी को फोन पर अपनी बहन की गंभीर स्थिति बताई। राम बिहारी गोस्वामी ने बिना वक्त गंवाए इस दर्दभरी दास्तान को सोशल मीडिया और अपने मित्रों तक पहुंचाया। इस संदेश को पढ़ते ही नागौद हाल पन्ना के प्रतिष्ठित स्कूल संचालक रितेश सिंह परिहार का दिल पसीज गया।

20 जून की झुलसाती धूप भी नहीं रोक सकी कदम

20 जून को जब आसमान से आग बरस रही थी और दोपहर के 12 बजे पारा सातवें आसमान पर था, तब रितेश सिंह परिहार ने अपनी परवाह न करते हुए जिला ब्लड बैंक का रुख किया। उन्होंने स्वेच्छा से रक्तदान कर तड़पती हुई पूजा को जीवनदान दिया। इस अनुकरणीय कार्य के लिए ब्लड बैंक प्रभारी राम नाथ ओमरे, लैब टेक्नीशियन दिलीप सिंह और समाजसेवी राम बिहारी गोस्वामी ने रक्तदाता रितेश सिंह परिहार का हृदय से आभार व्यक्त किया।भाई किडनी देने को तैयार, पर 5 लाख रुपयों की लाचारी बनी दीवारपूजा की जिंदगी बचाने के लिए उसके 28 वर्षीय भाई श्याम अहिरवार (पिता जयकरण) ने अपनी एक किडनी दान करने का साहसिक फैसला लिया है। एक भाई अपनी बहन को नया जीवन देने के लिए अपनी देह का अंग काटने को तैयार है, लेकिन गरीबी इस रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा बन गई है। डॉक्टरों के अनुसार, किडनी ट्रांसप्लांट के लिए आयुष्मान कार्ड की सुविधा के अतिरिक्त भी लगभग 5 लाख रुपये का खर्च आना है। आर्थिक तंगी और पैसों की व्यवस्था न होने के कारण यह ट्रांसप्लांट रुका हुआ है।

इंसानियत से अपील:आपकी एक छोटी सी मदद बचा सकती है पूजा की सांसें

एक तरफ रितेश सिंह परिहार जैसे लोग हैं जिन्होंने भीषण धूप में खून देकर इंसानियत का फर्ज निभाया, तो दूसरी तरफ एक बेबस परिवार है जो अपनी बेटी को मरता हुआ देखने को मजबूर है।पन्न जिले के समाजसेवी राम बिहारी गोस्वामी ने एवं पूजा के भाई और पिता ने अब समाज के दानीदाताओं और सरकार से गुहार लगाई है कि कोई उनकी आर्थिक मदद करे, ताकि इस बेटी का समय पर ट्रांसप्लांट हो सके और उसे एक नई जिंदगी मिल सके।

✍️ राम बिहारी गोस्वामी
RPKP INDIA NEWS
               पन्ना

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