MP पर कर्ज का बोझ बढ़ा: मोहन सरकार फिर जुटाएगी 2800 करोड़ रुपए, कुल देनदारी 5 लाख करोड़ के पार

8 और 22 साल की अवधि वाले बॉन्ड जारी करेगी सरकार, विकास परियोजनाओं पर खर्च होगी राशि

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने एक बार फिर वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए बाजार से ऋण लेने का फैसला किया है। राज्य सरकार लगभग 2800 करोड़ रुपए की राशि जुटाने के लिए राज्य विकास ऋण (State Development Loan) के तहत बॉन्ड जारी करेगी। वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह राशि दो अलग-अलग चरणों में जुटाई जाएगी।

जानकारी के मुताबिक सरकार 1600 करोड़ रुपए और 1200 करोड़ रुपए के दो बॉन्ड के माध्यम से निवेशकों से धन जुटाएगी। दोनों बॉन्ड की नीलामी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म पर की जाएगी।

दो चरणों में जुटाई जाएगी राशि

राज्य सरकार 2034 में परिपक्व होने वाले बॉन्ड के जरिए 1600 करोड़ रुपए जुटाएगी। इस ऋण की अवधि लगभग 8 वर्ष होगी। इसके अलावा 2048 में परिपक्व होने वाले दूसरे बॉन्ड के माध्यम से 1200 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि प्राप्त की जाएगी, जिसकी अवधि करीब 22 वर्ष होगी।

चालू वित्त वर्ष में बढ़ा कर्ज

नए ऋण को शामिल करने के बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज लगभग 13,800 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 तक राज्य पर करीब 4.88 लाख करोड़ रुपए का ऋण था। अब नई उधारी के बाद कुल देनदारी 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक होने का अनुमान है।

विकास परियोजनाओं पर होगा उपयोग

सरकारी सूत्रों के अनुसार जुटाई गई राशि का उपयोग प्रदेश में चल रही अधोसंरचना और विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए किया जाएगा। सड़क निर्माण, सिंचाई योजनाएं, बिजली वितरण व्यवस्था, जल संसाधन विकास तथा अन्य सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं में यह राशि खर्च की जा सकती है।

सरकार का पक्ष

राज्य सरकार का कहना है कि ऋण से प्राप्त धनराशि का उपयोग पूंजीगत निवेश और विकास कार्यों के लिए किया जाता है, जिससे प्रदेश में आधारभूत संरचना मजबूत होती है। सरकार का दावा है कि सिंचाई, ऊर्जा, परिवहन और ग्रामीण विकास से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि विकास कार्यों के लिए राज्यों द्वारा बाजार से ऋण लेना सामान्य प्रक्रिया है। हालांकि बढ़ते कर्ज के साथ वित्तीय अनुशासन और ऋण प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना भी आवश्यक होता है, ताकि भविष्य में ब्याज और भुगतान का दबाव नियंत्रित रखा जा सके।

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