मध्यप्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी तेज, न्यायमूर्ति रंजना देसाई की कमेटी ने संभाली कमान, कांग्रेस ने जताई चिंता

भोपाल पहुंची विशेषज्ञ समिति, महिला आयोग से लेकर धर्मगुरुओं और राजनीतिक दलों तक होगी व्यापक चर्चा

भोपाल। मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू करने की दिशा में सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। यूसीसी का प्रारूप तैयार करने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति ने भोपाल में अपना कार्य शुरू कर दिया है। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं।

सूत्रों के अनुसार समिति विभिन्न आयोगों, विभागों, सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और धार्मिक प्रतिनिधियों से चर्चा कर उनकी राय एकत्र करेगी। इसके आधार पर मध्यप्रदेश के लिए यूसीसी का विस्तृत मसौदा तैयार किया जाएगा।

कौन हैं न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई?

न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई का जन्म 30 अक्टूबर 1949 को महाराष्ट्र में हुआ था। उन्होंने मुंबई के एल्फिंस्टन कॉलेज से स्नातक और सरकारी विधि महाविद्यालय (GLC) से कानून की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 1973 में उन्होंने वकालत शुरू की और बाद में सरकारी अधिवक्ता के रूप में भी कार्य किया।

वर्ष 1996 में उन्हें मुंबई हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इसके बाद 2011 में वे भारत के सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश बनीं। अक्टूबर 2014 में सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण संवैधानिक और प्रशासनिक समितियों में अहम भूमिका निभाई।

यूसीसी ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया

समिति महिला आयोग, बाल आयोग, अनुसूचित जाति आयोग, अनुसूचित जनजाति आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग, अल्पसंख्यक आयोग सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों से चर्चा करेगी। इसके अलावा गृह विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, आदिवासी कल्याण विभाग और अन्य संबंधित विभाग भी अपने सुझाव प्रस्तुत करेंगे।

राज्य के मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों और विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं से भी राय ली जाएगी ताकि सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए संतुलित मसौदा तैयार किया जा सके।

आदिवासी परंपराओं पर विशेष फोकस

मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय निवास करता है। ऐसे में समिति आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्थाओं और रीति-रिवाजों का भी अध्ययन करेगी। राज्य सरकार पहले ही संकेत दे चुकी है कि जनजातीय समुदाय की विशिष्ट परंपराओं को विशेष महत्व दिया जाएगा।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी शुरू

यूसीसी को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। जहां भाजपा इसे समानता और न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस ने आदिवासी समुदायों की पारंपरिक व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि सभी पक्षों से विचार-विमर्श के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

क्या है यूसीसी?

समान नागरिक संहिता का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और पारिवारिक मामलों से जुड़े कानूनों को सभी नागरिकों के लिए समान बनाना है। वर्तमान में देश के विभिन्न समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। यूसीसी लागू होने पर इन मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू हो सकती है।

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