थाने चमकाने और रील्स में प्रेस विज्ञप्तियों से खुद को चमकाने वाली खाकी के राज में दिन-ब-दिन लहू से लाल हो रही सड़कें

मंगलनगर की सरेआम चाकूबाजी ने खोली कानून व्यवस्था की पोल, बढ़ते अपराधों के बीच पुलिसिंग पर उठे बड़े सवाल

(कटनी) कटनी जिले में इन दिनों पुलिसिंग की दो तस्वीरें देखने को मिल रही हैं। पहली तस्वीर सोशल मीडिया की है, जहां पुलिस की रील्स, प्रेस विज्ञप्तियां और उपलब्धियों का प्रचार लगातार जारी है। दूसरी तस्वीर जिले की सड़कों की है, जहां हत्या, हत्या के प्रयास, चाकूबाजी, लूट, चोरी और डकैती जैसी वारदातें लगातार आमजन के मन में भय पैदा कर रही हैं। सवाल यह है कि क्या पुलिस की प्राथमिकता अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करना है या फिर अपनी छवि को चमकाना?

रविवार को रंगनाथ थाना क्षेत्र के मंगलनगर में हुई सरेआम चाकूबाजी की घटना ने पुलिस के तमाम दावों की हकीकत उजागर कर दी। बीच आबादी में एक युवक पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला हुआ। युवक गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल पहुंचा, जबकि आरोपी वारदात के बाद आराम से फरार हो गए। इस घटना ने गश्त व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिस की सक्रियता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

थाने चमक रहे… अपराधी भी बेखौफ घूम रहे
इन दिनों जिले के थानों और कार्यालयों को रंग-रोगन कर आकर्षक बनाया जा रहा है। वहीं पुलिस की प्रेस विज्ञप्तियों और सोशल मीडिया पोस्टों में उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त दिखाई देती है। लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं। जिले में शायद ही कोई ऐसा दिन गुजरता हो जब किसी न किसी संगीन अपराध की खबर सामने न आए।

हत्या, हत्या का प्रयास, चाकूबाजी, लूट, चोरी और डकैती जैसी घटनाएं अब लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बनती जा रही हैं। आम नागरिक के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अपराध लगातार बढ़ रहे हैं तो फिर अपराध नियंत्रण के दावे आखिर किस आधार पर किए जा रहे हैं?

कागजों में अव्वल… धरातल पर सवाल
सरकारी आंकड़ों और प्रेस विज्ञप्तियों में जिले की पुलिसिंग भले ही उत्कृष्ट दिखाई देती हो, लेकिन धरातल पर हालात अलग तस्वीर बयां कर रहे हैं। रोजाना घट रही घटनाएं मानो कटनी की सड़कों पर लाल स्याही नहीं, बल्कि बहते खून से अपराध का नया इतिहास लिख रही हैं।

कप्तान के निर्देशों का असर क्यों नहीं दिखता?
पुलिस अधीक्षक द्वारा समय-समय पर अपराध नियंत्रण, गश्त और बेहतर पुलिसिंग के निर्देश जारी किए जाते हैं। लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाएं यह सवाल उठाती हैं कि आखिर इन निर्देशों का पालन फील्ड में किस हद तक हो रहा है? यदि आदेशों का प्रभावी पालन हो रहा है तो अपराधी इतने बेखौफ क्यों हैं, और यदि नहीं हो रहा तो जवाबदेही किसकी तय होगी?

जनता का भरोसा डगमगाने लगा
अपराधों की बढ़ती संख्या और कई मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर उठते सवालों ने आमजन के भरोसे को भी प्रभावित किया है। लोग अब यह महसूस करने लगे हैं कि अपराध होने के बाद की कार्रवाई से अधिक जरूरी अपराध होने से पहले उसे रोकना है। जब अपराधी खुलेआम वारदात कर फरार हो जाएं, तब केवल प्रेस विज्ञप्तियां और रील्स लोगों में सुरक्षा का विश्वास पैदा नहीं कर सकतीं।

रील्स से नहीं, रिजल्ट से बनेगी पुलिस की साख
जनता की अपेक्षा साफ है—थानों की चमक, सोशल मीडिया की सक्रियता और प्रेस विज्ञप्तियों से अधिक जरूरत अपराधियों पर सख्त कार्रवाई और कानून का इकबाल कायम करने की है। क्योंकि जब तक कटनी की सड़कों पर बहता खून नहीं रुकेगा, तब तक उपलब्धियों के दावे और चमचमाते थाने जनता के मन में उठ रहे सवालों का जवाब नहीं बन पाएंगे।

✍️ अमित तिवारी
       न्यूज एडिटर
 RPKP INDIA NEWS

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